नागपुर : राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने आज एक सीधा सवाल खड़ा किया। उन्होंने पूछा देश में कुछ लोग स्वातंत्र्यवीर सावरकर की तीखी आलोचना (Ambekar On Savarkar’s Critics) करते हैं, मैं इन आलोचकों से पूछना चाहता हूं कि आपके कौन से पूर्वज फांसी पर चढ़े थे? नागपुर के चिटणवीस सेंटर मे आयोजित देवर्षि नारद पत्रकारिता पुरस्कार समारोह में उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए सुनील आंबेकर ने कहा सेल्युलर जेल में यातनाएं सहन करने वाले स्वातंत्र्यवीर सावरकर कहते थे कि किसी व्यक्ति के संस्मरण, संस्कार, स्मृतियां कैसी हैं उस पर तय होता है कि, आप कठिन समय का सामना कितने धैर्य से कर सकते हो। सावरकर के यह विचार पत्रकारिता जगत में काम करने वालों के लिए बेहद उपयुक्त है।
इसे भी पढ़ें – कश्मीर में चुनाव कराने से डर रही है भाजपा : उमर अब्दुल्ला
वर्तमान दौर की पत्रकारिता का विश्लेषण करते हुए सुनील आंबेकर ने कहा कि समाज में 5 से 10 फीसदी लोग ही अपने विचारों और सिद्धांतों पर अडिग रहते हैं। मानव कल्याण के सकारात्मक मार्ग पर चलते हुए इन्हें परिणामों कि चिंता नही होती। वहीं 5 से 10 फीसदी लोग अपनी नकारात्मकता पर अडे रहते हैं। ऐसे लोगो को नकारात्मक चीजे ही प्रभावित करती हैं। शेष बचे 80 फीसदी लोग माहौल को देख कर काम करते है। अपने मतलब के लिए ऐसे लोगो को यू-टर्न लेने में जरा भी देर नही लगती।
इसे भी पढ़ें – बिपारजॉय : गुजरात ने 21,000 लोगों को आश्रयस्थल भेजा, ऑयल रिग से 50 कर्मचारियों को निकाला गया
Ambekar On Savarkar’s Critics – उन्होंने कहा कि ऐसी परिस्थितियों में सकारात्मक चीजों के लिए अपने विचार और सिद्धांतों पर अडिग रहने वालों को पुरस्कार के माध्यम से प्रेरणा मिलती है। वहीं समाज के 80 फीसदी लोगों को किस ओर जाना चाहिए, उसका मार्गदर्शन प्राप्त होता है। अपनी बातों को विस्तार देते हुए आंबेकर ने कहा कि, मौजूदा समय में मीडिया और सोशल मीडिया सूचना के महासागर की तरह है। इस महासागर में हम अपनी नाव कैसे चलाते हैं उस पर बहुत सी बातें निर्भर होती है। आंबेकर ने आह्वान किया कि, यदि हम अच्छा मीडिया चाहते हैं तो हमें सोशल मीडिया पर जिम्मेदारी से पेश आना होगा।

