चंडीगढ़ : हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी वीरवार को अंबाला कैंट में बने एशिया के सबसे बड़े भव्य शहीदी स्मारक का बारबाडोस अवलोकन करने जाएंगे। अंबाला छावनी से सातवीं बार के लोकप्रिय विधायक और हरियाणा सरकार में ऊर्जा, परिवहन एवं श्रम मंत्री अनिल विज के सार्थक एवं भगीरथ प्रयासों से केंद्रीय (Asia’s largest martyrdom memorial) मंत्री मनोहर लाल के शासनकाल में जिस ऐतिहासिक परियोजना का निर्माण कार्य शुरू हुआ था, उस शहीद स्मारक स्थल पर मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी काफी समय बिताएंगे।

🪷 लाइट एंड साउंड शो के साथ दिखेगा डिजिटल इतिहास

उल्लेखनीय है कि अंबाला छावनी में सन 1857 में आजादी की पहली लड़ाई के वीर नायकों की पावन याद में इस शहीदी स्मारक का निर्माण लगभग 22 एकड़ की विशाल भूमि पर ₹700 करोड़ से अधिक की लागत से किया गया है। यह स्मारक अब पूरी तरह बनकर तैयार हो चुका है, जिसमें इस ऐतिहासिक क्रांति से संबंधित संपूर्ण गौरवशाली इतिहास को विभिन्न अत्याधुनिक डिजिटल माध्यमों से प्रदर्शित किया जाएगा।

⚔️  राव तुलाराम और राजा नाहर सिंह को नमन

हरियाणा के ऊर्जा एवं परिवहन मंत्री अनिल विज ने इस संबंध में गर्व व्यक्त करते हुए कहा कि, “हरियाणा की वीर भूमि अंबाला छावनी में बन रहा ‘आजादी की पहली लड़ाई का शहीद स्मारक’ हमारी आने वाली पीढ़ियों को देशभक्ति, अटूट बलिदान और राष्ट्रभक्ति की सच्ची प्रेरणा देगा।” इतिहास के पन्नों को पलटें तो यह दर्ज है कि 10 मई 1857 को भले ही मेरठ में क्रांति का बिगुल बजा, लेकिन उससे पहले ही अंबाला छावनी में अंग्रेजी दमनकारी शासन के खिलाफ भारतीय सैनिकों के भीतर विद्रोह की आग सुलग चुकी थी।

Asia’s largest martyrdom memorial – रविवार, 10 मई 1857 को सुबह लगभग 9 बजे भारतीय रेजिमेंट 60वीं नेटिव इन्फैंट्री ने अंग्रेजों के खिलाफ खुला सशस्त्र विद्रोह कर दिया था। अंबाला, रोहतक, हिसार, झज्जर, रेवाड़ी, गुड़गांव और करनाल क्षेत्र में क्रांतिकारियों ने अंग्रेजी सत्ता की चूलें हिला दी थीं। राव तुलाराम, झज्जर के नवाब अब्दुर्रहमान खान, बल्लभगढ़ के राजा नाहर सिंह जैसे अनेक वीरों ने अपने प्राणों की आहुति देकर इस आंदोलन को जीवित रखा था।

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