जालंधर : पंजाब के चीफ सेक्रेटरी ने एक अप्रत्याशित और सख्त फैसला लेते हुए गत रात्रि जालंधर नगर निगम के हैल्थ ऑफिसर डॉ. श्रीकृष्ण शर्मा को तत्काल प्रभाव से सस्पैंड कर दिया। सस्पैंशन के साथ ही उनका मुख्यालय चंडीगढ़ कर दिया गया है। डॉ. श्रीकृष्ण शर्मा पिछले कई वर्षों से जालंधर निगम में सेवाएं दे रहे हैं और (administrative surgical strike) शहर के कूड़े के प्रबंधन (सॉलिड वेस्ट मैनेजमैंट) से जुड़े कामों की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। उन पर आरोप है कि उन्होंने नैशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एन.जी.टी.) में चल रहे एक मामले में भ्रामक हलफनामा दायर किया।

सूत्रों के अनुसार पिछले दिनों एन.जी.टी. में जालंधर निगम से जुड़े दो केस एक साथ सुनवाई के लिए आए थे। दोनों केस सॉलिड वेस्ट मैनेजमैंट रूल्स-2016 से संबंधित थे। एक केस में चीफ सैक्रेटरी की ओर से एन.जी.टी. में जो हलफनामा पेश किया गया, उसमें जालंधर निगम के बारे में कुछ तथ्य दिए गए थे। वहीं दूसरे केस में डॉ. श्रीकृष्ण शर्मा की ओर से दिया हलफनामा चीफ सैक्रेटरी के हलफनामे से पूरी तरह भिन्न था। जब पंजाब सरकार के प्रतिनिधियों को इस अंतर का पता चला तो पूरी अफसरशाही में हड़कंप मच गया।

administrative surgical strike – डॉ. श्रीकृष्ण शर्मा ने एन.जी.टी. में जो शपथ-पत्र दायर किया, उसमें जो भी डाटा था, वह उन्हें जालंधर निगम के ओ. एंड एम. सेल के अधिकारियों ने व्हाट्सएप पर फॉरवर्ड किया था। डॉक्टर ने उसे हुबहू हलफनामे के रूप में पेश कर दिया। ओ. एंड एम. सैल के पास ही सॉलिड वेस्ट मैनेजमैंट के टैंडर लगाने और अन्य कामों की जिम्मेदारी है। सूत्रों का कहना है कि सस्पेंशन की असली वजह ओएंडएम सेल के उन अधिकारियों का डाटा हो सकता है, जिसे डॉक्टर ने बिना जांचे एन.जी.टी. तक पहुंचा दिया। डॉ. श्रीकृष्ण शर्मा के सस्पैंड होने से जालंधर निगम के अन्य अधिकारियों में भी खलबली मच गई है।

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