1984 के सिख विरोधी दंगों के मुख्य दोषियों में शामिल पूर्व कांग्रेसी नेता सज्जन कुमार के निधन को लेकर दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के पूर्व अध्यक्ष मनजीत सिंह जीके की तीखी प्रतिक्रिया (biggest crocodile of 1984 sikh massacre) सामने आई है।

biggest crocodile of 1984 sikh massacre – मनजीत सिंह जीके ने कहा कि तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद नवंबर 1984 में हुए निर्दोष सिखों के नरसंहार का सबसे बड़ा मगरमच्छ सज्जन कुमार ही था। उन्होंने कहा कि धर्मराज शास्त्री, एच.के.एल. भगत और अर्जुन दास जैसे चेहरों की प्राकृतिक मौत हो गई और वे जेल नहीं जा सके, लेकिन सिख कौम ने सज्जन कुमार के खिलाफ 40 वर्षों तक कानूनी लड़ाई लड़ी।

 40 साल तक मिटाए गए सबूत, गवाहों को धमकाया गया; फिर भी पहुंचा जेल

मनजीत सिंह जीके ने कानूनी संघर्ष की कठिनाइयों को उजागर किया:

    • सबूत मिटाने के आरोप: उन्होंने कहा कि 40 वर्षों के दौरान तत्कालीन सरकारों के संरक्षण में मामलों से जुड़े अहम सबूत मिटा दिए गए थे।

    • दहशत का माहौल: गवाहों को डराया-धमकाया गया और मुकदमों को भटकाने की पूरी कोशिशें की गईं।

    • कौम का संघर्ष: इसके बावजूद सिख समुदाय और वकीलों ने हार नहीं मानी और एक बेहद लंबी व ऐतिहासिक अदालती लड़ाई के बाद सज्जन कुमार को जेल की सलाखों के पीछे भिजवाया, जहां वह पिछले 6 वर्षों से कैद था।

       

1984 की बर्बरता रूह कंपाने वाली थी, फांसी की सजा न मिलने का मलाल

मनजीत सिंह ने दंगों के दौरान पीड़ितों पर हुए अमानवीय अत्याचारों का जिक्र किया:

    • क्रूरता की हदें: उन्होंने कहा कि दंगों के दौरान 14-15 साल के मासूम बच्चों, उनके पिताओं और परिजनों को बेरहमी से कत्ल किया गया तथा महिलाओं व बच्चियों के साथ अमानवीय अत्याचार हुए।

    • संस्कार तक नहीं करने दिया: पीड़ितों को मृतकों का अंतिम संस्कार तक करने से रोका गया। असहाय महिलाओं और बच्चियों ने घरों का फर्नीचर तोड़कर अधजले शवों को किसी तरह जलाने की बेबस कोशिश की थी।

    • सजा-ए-मौत की मांग: जीके ने कहा कि जिस दिन सज्जन कुमार को अदालत ने दोषी ठहराया था, उन्हें उम्मीद थी कि उसे फांसी की सजा मिलेगी। कौम लगातार उसे फांसी दिलाने की मांग कर रही थी, लेकिन उम्रकैद की सजा दी गई।

       

 

 

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