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    Home » 3 साल बाद आया अधिक मास कालाष्टमी का महासंयोग; 8 जून को भूलकर भी न करें ये 5 गलतियां

    3 साल बाद आया अधिक मास कालाष्टमी का महासंयोग; 8 जून को भूलकर भी न करें ये 5 गलतियां

    June 5, 2026 धार्मिक 2 Mins Read
    Adhik Maas Kala Ashtami
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    सनातन धर्म में हर माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि के दिन कालाष्टमी मनाई जाती है. इस विशेष दिन पर पूरे विधि-विधान और निष्ठा से भगवान काल भैरव की पूजा-अर्चना और व्रत किया जाता है. शास्त्रों के अनुसार, भगवान काल भैरव साक्षात देवाधिदेव महादेव के अंशावतार हैं और उनका यह रूप अत्यंत रौद्र व भव्य है. धार्मिक मान्यता है (Adhik Maas Kala Ashtami) कि भैरव देव की श्रद्धापूर्वक पूजा करने से साधक के जीवन की हर प्रकार की नकारात्मता और भय दूर हो जाते हैं.

    🚫 कालाष्टमी के दिन भूलकर भी न करें ये 5 बड़ी गलतियां 

    धर्म शास्त्रों के अनुसार कालाष्टमी के दिन नियमों का पालन न करने पर काल भैरव रुष्ट हो सकते हैं. इस दिन निम्नलिखित गलतियों से दूर रहना चाहिए:

      • 🐾 कुत्ते को जूते-चप्पल न मारें: कालाष्टमी के दिन भूलकर भी किसी कुत्ते को जूता-चप्पल नहीं दिखाना चाहिए और न ही मारना चाहिए. इसके अलावा उसे किसी भी प्रकार की शारीरिक चोट या कष्ट न पहुंचाएं. सनातन धर्म में श्वान (कुत्ता) को भगवान काल भैरव की आधिकारिक सवारी और उनका प्रतीक माना जाता है.

      • 🥣 जूठा भोजन ना खिलाएं: इस पवित्र दिन पर गलती से भी कुत्ते को अपना जूठा भोजन ना खिलाएं. ऐसा करने वाले जातकों को कालभैरव के घोर अपमान का दोष लगता है. इस दिन काले कुत्ते को हमेशा आदरपूर्वक ताजी व मुलायम रोटी, गुड़ या मीठे बिस्कुट खिलाने चाहिए.

      • 🍷 मांसाहार और शराब से रहें दूर: कालाष्टमी के दिन व्रत न रखने वाले सामान्य लोगों के लिए भी तामसिक भोजन, मांसाहार (Non-Veg) और मदिरा (शराब) का सेवन पूरी तरह वर्जित माना गया है. इस दिन घर में शुद्धता बनाए रखें, अन्यथा इसका परिणाम बेहद नुकसानदेह हो सकता है.

     

    ✨ अधिक मास कालाष्टमी पर अवश्य करें ये शुभ काम 

    यदि आप जीवन के संकटों से मुक्ति पाना चाहते हैं, तो इस पावन तिथि पर ये उपाय बेहद कारगर माने जाते हैं:

      • 🥛 काले कुत्ते की सेवा: कालाष्टमी के दिन किसी भी काले कुत्ते को आदरपूर्वक कच्चा दूध पिलाएं या दूध-रोटी बनाकर खिलाएं. यह उपाय काल भैरव को तुरंत प्रसन्न करता है.

      • 🪔 सरसों के तेल का दीपक: शाम के समय किसी सिद्ध काल (Adhik Maas Kala Ashtami) भैरव मंदिर में जाएं और उनके विग्रह के सामने शुद्ध सरसों के तेल का चौमुखी दीया जलाएं.

         

     

     

     

     

     

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