फरीदाबाद: हरियाणा के औद्योगिक शहर फरीदाबाद के प्रमुख बीके सिविल अस्पताल (BK Civil Hospital) से एक बेहद हैरान करने वाला और सनसनीखेज मामला प्रकाश में आया है। यहाँ अस्पताल परिसर में अचानक एक अज्ञात व्यक्ति पहुंचा और उसने खुद को सतर्कता विभाग (विजिलेंस) का वरिष्ठ अधिकारी बताते हुए मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) डॉ. जयंत आहूजा को नौकरी से बर्खास्त करवाने की गंभीर धमकी दी। आरोपी ने सीएमओ कार्यालय के भीतर जमकर हंगामा किया और वहां मौजूद अधिकारियों तथा अन्य कर्मचारियों पर अपना झूठा रौब झाड़ने का पूरा प्रयास किया। हालांकि, सीएमओ ने उसकी संदिग्ध हरकतों को तुरंत भांप लिया और बिना देर किए आपातकालीन सेवा डायल-112 पर कॉल करके पुलिस को मौके पर बुला लिया, जिसके बाद पुलिस ने आरोपी को दबोच लिया और एनआईटी नंबर-3 पुलिस चौकी ले गई।
अस्पताल में चल रहे करीब 50 लाख रुपये के चर्चित डीजल घोटाले की जांच के बीच आरोपी ने फायदा उठाने की कोशिश
प्राप्त जानकारी के अनुसार, इन दिनों बीके अस्पताल के भीतर लगभग 50 लाख रुपये के कथित डीजल घोटाले को लेकर आधिकारिक जांच चल रही है। इसी संवेदनशील मामले का गलत फायदा उठाने और अस्पताल प्रबंधन पर दबाव बनाने के लिए यह शातिर शख्स विजिलेंस अधिकारी होने का नाटक करते हुए सीधे सीएमओ कार्यालय जा पहुंचा था। उसका मुख्य उद्देश्य अस्पताल के कर्मचारियों और अधिकारियों को डरा-धमकाकर अपनी अवैध धौंस जमाना था, ताकि वह स्थिति का अनुचित लाभ उठा सके।
सीएमओ डॉ. जयंत आहूजा को हुआ शक, सूझबूझ दिखाते हुए तुरंत डायल-112 पर दी पुलिस को सूचना
इस पूरी घटना के संबंध में जानकारी देते हुए सीएमओ डॉ. जयंत आहूजा ने बताया कि अस्पताल में चल रहे डीजल घोटाले की आधिकारिक जांच मुख्यालय स्तर की एक विशेष टीम द्वारा की जा रही है। आरोपी ने जिस शातिर तरीके से उनके और उनके कार्यालय के स्टाफ के साथ बातचीत की और धौंस जमाई, उससे उन्हें उसकी पहचान पर तुरंत संदेह हो गया। सीएमओ को पूरी आशंका थी कि यह व्यक्ति किसी बड़े फर्जीवाड़े को अंजाम देने या फर्जी अधिकारी बनकर अवैध रूप से पैसे ऐंठने के इरादे से आया है। सतर्कता दिखाते हुए उन्होंने तुरंत डायल-112 नंबर पर फोन घुमाया और पुलिस बल को अस्पताल परिसर में बुलवा लिया।
उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर का रहने वाला है पकड़ा गया आरोपी, पुलिस ने मामला दर्ज कर शुरू की गहन छानबीन
एनआईटी नंबर-3 पुलिस चौकी के इंचार्ज मनोज ने मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि पकड़े गए आरोपी की पहचान राजपाल के रूप में हुई है, जो मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जिले का रहने वाला है। शुरुआती पुलिस पूछताछ में यह बात सामने आई है कि आरोपी ने पूरी तरह से फर्जी पहचान गढ़ी थी और खुद को बड़ा सरकारी अधिकारी बताकर अस्पताल के प्रशासनिक कामकाज को प्रभावित करने की कोशिश कर रहा था। राहत की बात यह रही कि अस्पताल के किसी भी डॉक्टर, अधिकारी या कर्मचारी ने इस फर्जी शख्स के दबाव में आकर एक भी रुपया नहीं दिया। फिलहाल, पुलिस ने आरोपी को हिरासत में लेकर उसके पुराने आपराधिक रिकॉर्ड और इस साजिश में शामिल अन्य लोगों के बारे में गहराई से जांच शुरू कर दी है।


