सागर: मध्य प्रदेश के विभिन्न टोल प्लाजा पर अक्सर वाहन चालकों और प्रबंधकों के बीच विवाद की खबरें सामने आती रहती हैं। कभी सर्वर डाउन होने का बहाना तो कभी तकनीकी खराबी की आड़ में अवैध रूप से पैसे वसूले जाने के गंभीर आरोप लगते हैं। इन तमाम अनियमितताओं और मनमानी पर पूरी तरह शिकंजा कसने के लिए मध्य प्रदेश रोड डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (MPRDC) ने एक बेहद अहम और बड़ा कदम उठाया है। इसके तहत प्रदेश के प्रमुख 149 टोल प्लाजा को एक मजबूत डिजिटल नेटवर्क से जोड़ा जा रहा है, जिसकी सीधी और लाइव निगरानी राजधानी भोपाल स्थित मुख्य कार्यालय से की जाएगी। इस आधुनिक व्यवस्था के लागू होने से नेटवर्क बाधित होने, कनेक्टिविटी फेल होने या डेटा ट्रांसफर में होने वाली गड़बड़ियों पर पैनी नजर रखी जा सकेगी और टोल टैक्स कलेक्शन पूरी तरह पारदर्शी हो जाएगा।
फास्टैग के बाद भी नहीं थमी थीं अवैध वसूली की शिकायतें, अब 3.81 करोड़ की लागत से भोपाल मुख्यालय से जुड़ेंगे टोल
खास बात यह है कि देश भर में फास्टैग (FASTag) व्यवस्था लागू होने के बावजूद टोल प्लाजा पर होने वाले विवादों और मनमाने तरीके से वसूली किए जाने की शिकायतों से पूरी तरह निजात नहीं मिल पाई है। कभी इंटरनेट कनेक्टिविटी गायब होने तो कभी सर्वर न मिलने का हवाला देकर वाहन चालकों को परेशान किया जाता है। इन सभी समस्याओं का स्थाई समाधान निकालने के लिए एमपीआरडीसी ने प्रदेश के 149 टोल प्लाजा को डिजिटल नेटवर्क के दायरे में लाने की योजना पर काम शुरू कर दिया है। इन सभी टोल प्लाजा को एमपीआरडीसी के भोपाल मुख्यालय स्थित मैनेज्ड मल्टी प्रोटोकॉल लेबल स्विचिंग नेटवर्क से जोड़ने की प्रक्रिया के अंतर्गत विभाग द्वारा टेंडर भी जारी किए जा चुके हैं, जिस पर कुल 3.81 करोड़ रुपये की लागत आएगी।
मैनेज्ड एमपीएलएस तकनीक के जरिए भोपाल मुख्यालय से रखी जाएगी हर टोल प्लाजा की रियल-टाइम निगरानी
इस परियोजना के तहत जिस अत्याधुनिक तकनीक का उपयोग किया जा रहा है, उसे ‘मैनेज्ड मल्टी-प्रोटोकॉल लेबल स्विचिंग’ (Managed MPLS) कहा जाता है। यह एक विशेष प्रकार की सुरक्षित दूरसंचार सेवा है, जिसके माध्यम से नेटवर्क प्रदाता द्वारा किसी कंपनी के अलग-अलग केंद्रों या शाखाओं को एक निजी वाइड एरिया नेटवर्क (WAN) से जोड़ा जाता है। इस तकनीक के उपयोग से कार्य में कम समय लगता है, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग और वॉइस कॉल्स बेहद सुचारू रूप से चलती हैं, तथा महत्वपूर्ण डेटा ट्रैफिक को सामान्य डेटा की तुलना में सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाती है। यह आम इंटरनेट के जोखिमों से पूरी तरह सुरक्षित एक निजी नेटवर्क होता है, जिसके जरिए भोपाल मुख्यालय से प्रदेश के हर एक टोल प्लाजा की रियल-टाइम मॉनिटरिंग की जा सकेगी।
टोल संचालन में बढ़ेगी पारदर्शिता, टैक्स कलेक्शन पर सीधी नजर और विवादों का होगा त्वरित समाधान
इस हाई-टेक व्यवस्था के धरातल पर उतरने के बाद टोल प्लाजा पर आए दिन होने वाले तनावपूर्ण विवादों का चुस्ती से समाधान किया जा सकेगा। टोल संचालन की प्रक्रिया बेहद पारदर्शी होगी और मुख्यालय स्तर से टैक्स कलेक्शन के आंकड़ों की सीधी समीक्षा की जा सकेगी। इन सभी 149 टोल प्लाजा को एमपीएलएस नेटवर्क से जोड़कर भोपाल स्थित कार्यालय को एक हाई-स्पीड नेटवर्क हब के रूप में विकसित किया जा रहा है। इस पूरी कवायद के बाद राज्य के तमाम टोल प्लाजा एक केंद्रीकृत डिजिटल नेटवर्क के सुरक्षा चक्र और निगरानी दायरे में आ जाएंगे।
संभागवार किया गया है टोल प्लाजा का चयन, लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने दी प्रोजेक्ट की पूरी जानकारी
इस व्यापक डिजिटल नेटवर्क को स्थापित करने के लिए एमपीआरडीसी द्वारा संभागवार टोल प्लाजा का व्यवस्थित चयन किया गया है। इस पूरे मामले पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए राज्य के लोक निर्माण विभाग (PWD) के मंत्री राकेश सिंह ने बताया कि टोल प्लाजा को लेकर अक्सर आम जनता से तरह-तरह की शिकायतें मिलती हैं और कई बार गंभीर विवाद भी खड़े हो जाते हैं। सर्वर और नेटवर्क खराब होने का बहाना बनाकर वाहन चालकों से मनमाने ढंग से वसूली करने की शिकायतें बड़े पैमाने पर सामने आती हैं। इसी संवेदनशीलता को देखते हुए सरकार ने यह बड़ा निर्णय लिया है ताकि टोल मैनेजमेंट पर पूरी पारदर्शिता के साथ निगरानी रखी जा सके। मंत्री ने स्पष्ट किया कि इस डिजिटल जुड़ाव से न केवल टोल के कामकाज में पारदर्शिता आएगी, बल्कि इसका सीधा और बड़ा लाभ आम उपभोक्ताओं के साथ-साथ शासन को भी मिलेगा।


