नई दिल्ली: देश की सर्वोच्च अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट में आज गुरुवार को भारतीय सिनेमा के पहले ‘सुपरस्टार’ कहे जाने वाले दिवंगत अभिनेता राजेश खन्ना से जुड़े एक चर्चित कानूनी मामले पर अहम सुनवाई संपन्न हुई। शीर्ष अदालत ने पूर्व अभिनेत्री और लेखिका अनीता आडवाणी की उस विशेष याचिका को पूरी तरह से खारिज कर दिया है, जिसमें उन्होंने लीजेंड्री एक्टर राजेश खन्ना के साथ अपने पूर्व संबंधों को कानूनी तौर पर ‘शादी’ के रूप में मान्यता दिए जाने की (Rajesh Khanna Case) मांग उठाई थी। सुप्रीम कोर्ट ने इस पूरी कानूनी लड़ाई पर कड़ी टिप्पणी करते हुए इसे एक “विलासितापूर्ण मुकदमा” करार दिया है।
Rajesh Khanna Case – अनीता आडवाणी का यह दावा रहा है कि वह दिवंगत सुपरस्टार राजेश खन्ना के साथ उनके अंतिम समय तक कई वर्षों तक ‘लिव-इन रिलेशनशिप’ में साथ रहीं थीं। वर्ष 2012 में जब राजेश खन्ना का निधन हुआ, तब उनके परिवार यानी उनकी अलग रह रही पत्नी डिंपल कपाड़िया, बेटी ट्विंकल खन्ना और दामाद अक्षय कुमार ने उन्हें मुंबई के बांद्रा स्थित मशहूर बंगले ‘आशीर्वाद’ से बाहर कर दिया था। इसके बाद, साल 2013 में अनीता ने ‘घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम, 2005’ (DVA) के अंतर्गत मजिस्ट्रेट अदालत में डिंपल कपाड़िया और उनके परिवार के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी, जिसमें उन्होंने मासिक गुजारा भत्ता और बांद्रा में एक फ्लैट की मांग रखी थी।
यह घरेलू हिंसा अधिनियम के दायरे में आने वाला मामला नहीं है
पूर्व में बॉम्बे हाईकोर्ट ने इस मामले की सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया था कि राजेश खन्ना के साथ आडवाणी का रिश्ता पारंपरिक या कानूनी रूप से शादी की श्रेणी में नहीं आता है, इसलिए वह घरेलू हिंसा कानून के प्रावधानों के तहत किसी भी तरह की कानूनी राहत पाने की हकदार नहीं हैं। अदालत ने यह भी माना था कि खन्ना परिवार के अन्य सदस्यों को इस विवाद में नहीं घसीटा जा सकता क्योंकि आडवाणी कभी उनके साथ एक छत के नीचे नहीं रहीं। अनीता आडवाणी ने अपने करियर की शुरुआत साल 1978 में फिल्म “शालीमार” से की थी और बाद में कुछ अन्य फिल्मों व रियलिटी शो में भी नजर आई थीं।


