हरियाणा के भीतर बिजली के निजीकरण की प्रक्रिया पर फिलहाल पूरी (Haryana Power Privatization Cancelled) तरह से ब्रेक लग गया है। गुरुग्राम और नूंह जिलों में किसी निजी कंपनी को आगामी 25 वर्षों तक बिजली वितरण का अधिकार देने से जुड़ा हुआ लाइसेंस अब आधिकारिक तौर पर रद्द कर दिया गया है। पंचकूला में हरियाणा विद्युत विनियामक आयोग (HERC) के कार्यकारी चेयरमैन मुकेश गर्ग और सदस्य शिव कुमार की संयुक्त बेंच ने इस संबंध में औपचारिक आदेश जारी कर दिए हैं।
क्या है पूरा मामला: जानिए कैसे हुआ था प्राइवेट कंपनी को लाइसेंस का आवंटन
इस पूरे घटनाक्रम की पृष्ठभूमि पर नजर डालें तो हरियाणा विद्युत विनियामक आयोग (HERC) ने बीते 19 अक्टूबर 2026 को अपने एक आदेश के माध्यम से ‘इलेवन पावर प्राइवेट लिमिटेड’ (EPPL) को गुरुग्राम और नूंह के इलाकों में 25 साल की लंबी अवधि के लिए समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस (Parallel Distribution Licence) प्रदान किया था। इसके बाद कंपनी ने आगामी 21 अक्टूबर को इस प्रस्ताव पर अपनी पूर्ण सहमति भी दर्ज करा दी थी, जिसके बाद (Haryana Power Privatization Cancelled) से ही इसे लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया था।
निजीकरण के विरोध में सरकार ने दी थी राजस्व और जनहित प्रभावित होने की दलील
इस पूरे मामले में सरकार की तरफ से पक्ष रखते हुए कड़े तर्क दिए गए थे। सरकार ने आयोग को बताया कि निजी कंपनियों को इस प्रकार का लाइसेंस देने से राज्य के सरकारी राजस्व पर बहुत बुरा असर पड़ेगा। इसके अलावा, इस कदम से किसानों, आम घरेलू उपभोक्ताओं और बिजली निगमों के मेहनती कर्मचारियों के बीच भारी असंतोष और आक्रोश पनप रहा है। सरकार का यह भी कहना था कि समानांतर व्यवस्था लागू होने से क्रॉस-सब्सिडी की मौजूदा व्यवस्था खत्म हो जाएगी, जिसके तहत अमीर और महंगे उपभोक्ता प्राइवेट कंपनी के पास चले जाएंगे और अंततः सारा वित्तीय घाटा सरकारी डिस्कॉम (DISCOMs) के सिर आ जाएगा।




