अयोध्या (उत्तर प्रदेश): श्री राम जन्मभूमि मंदिर में व्यवस्था और मर्यादा को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से पुजारियों के लिए सख्त नियमावली लागू कर दी गई है। मंदिर के गर्भगृह में अब पुजारियों द्वारा मोबाइल फोन ले जाने पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। इसके साथ ही पुजारियों की वेशभूषा, तिलक, क्षौर (पंचकेशी का पालन) और (new rules for priests) व्यक्तिगत शुचिता को लेकर कड़े निर्देश जारी किए गए हैं।
शौच के उपरांत बिना स्नान किए मंदिर या कोठार में प्रवेश वर्जित रहेगा। परिसर में उपस्थिति के दौरान मस्तक पर तिलक धारण करना और धर्म समिति द्वारा निर्धारित पारंपरिक वस्त्र पहनना अनिवार्य होगा। ड्यूटी के दौरान पुजारियों को मंदिर व्यवस्थापकों, धर्मगुरुओं और आचार्यों के अलावा अन्य सुरक्षाकर्मियों या ट्रस्ट के कार्यकर्ताओं से अनावश्यक बातचीत से दूर रहने को कहा गया है।
new rules for priests – गर्भगृह या मंदिर परिसर में आपस में लगातार बातचीत, समूह चर्चा और हंसी-मजाक पर पूर्ण रोक रहेगी। किसी भी प्रकार की असुविधा या असंतोष की स्थिति में केवल मुख्य आचार्य से मार्गदर्शन प्राप्त करने के निर्देश दिए गए हैं। सेवाकाल के दौरान समयपालन अनिवार्य होगा और ड्यूटी समाप्त होने पर सहयोगियों को लिखित में कार्य समीक्षा सौंपनी होगी।
गर्भगृह में बाहरी सामग्री ले जाने पर मनाही
मंदिर प्रशासन द्वारा स्वीकृत एवं उपलब्ध कराए गए आधिकारिक भोग-प्रसाद के अतिरिक्त किसी भी प्रकार की बाहरी सामग्री को गर्भगृह में ले जाने की अनुमति नहीं होगी। आचार्य इंद्रदेव मिश्रा के अनुसार, मंदिर में सभी अनुष्ठान विशुद्ध रामानंदी परंपरा के तहत संपन्न हो रहे हैं। यह कोई विशेष सनद या कठोर आदेश नहीं, बल्कि पूजा-अर्चना की शास्त्रीय मर्यादा और गरिमा बनाए रखने के लिए दी गई आवश्यक व्यवस्था है।


