सनातन धर्म में भाद्रपद मास का विशेष धार्मिक महत्व है। इस पवित्र महीने में भगवान श्रीहरि विष्णु के साथ-साथ देवाधिदेव महादेव की पूजा-अर्चना अत्यंत फलदायी मानी जाती है। हर माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि (Masik Shivratri) को मासिक शिवरात्रि का व्रत रखा जाता है।
Masik Shivratri – धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भाद्रपद मास की मासिक शिवरात्रि पर श्रद्धाभाव से भगवान शंकर की पूजा, जलाभिषेक और मंत्र जाप करने से साधक को मानसिक शांति, आरोग्यता और मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है। सितंबर 2026 में मासिक शिवरात्रि का पावन व्रत 9 सितंबर, बुधवार को रखा जाएगा। मासिक शिवरात्रि की मुख्य पूजा मध्यरात्रि यानी निशिता काल में करने का विधान है।
पंचांग के अनुसार चतुर्दशी तिथि और पूजन का सटीक समय:
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चतुर्दशी तिथि प्रारंभ: 9 सितंबर 2026 को दोपहर 12:32 बजे
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चतुर्दशी तिथि समाप्त: 10 सितंबर 2026 को सुबह 10:35 बजे
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उदयातिथि एवं निशिता काल पूजन: 9 सितंबर और 10 सितंबर की मध्यरात्रि (निशिता काल मुहूर्त) में मुख्य पूजन संपन्न किया जाएगा।
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व्रत एवं पारण: श्रद्धालु 9 सितंबर को पूरे दिन उपवास रखकर रात्रि जागरण और महादेव की आराधना करेंगे।
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पूजन विधि एवं अनुष्ठान: निशिता काल में करें रुद्राभिषेक
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पवित्र स्नान व संकल्प: सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण कर व्रत का संकल्प लें।
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अभिषेक सामग्री: रात्रि के समय शिवलिंग पर गंगाजल, कच्चा दूध, दही, देसी घी और शहद से पंचामृत अभिषेक करना अत्यंत कल्याणकारी माना गया है।
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अर्पण: बिल्वपत्र, धतूरा, भांग, सफेद चंदन, अक्षत और भस्म अर्पित करें।
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मंत्र जाप: पूजा के दौरान निरंतर पंचाक्षरी मंत्र ‘ॐ नमः शिवाय’ का जाप करते रहें।
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