उज्जैन (मध्य प्रदेश): धर्मनगरी उज्जैन से एक अत्यंत संवेदनशील और विचलित करने वाला मामला प्रकाश में आया है। सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से प्रसारित हो रहा है, जिसमें खुद को अघोरी और किन्नर अखाड़े की महामंडलेश्वर बताने वाली काली उर्फ नंद गिरी श्मशान घाट पर एक जलती हुई चिता के पास खड़ी दिखाई दे रही हैं।
आरोप है कि उन्होंने जलती चिता से मांस निकालकर खाने का दावा किया है। इस घटना का वीडियो सार्वजनिक होते ही उज्जैन के धार्मिक हलकों और साधु-संतों में भारी आक्रोश और नाराजगी फैल गई है।
⚔️ हाथ में तलवार और सनसनीखेज दावा: इंस्टाग्राम पर शेयर हुआ था वीडियो
वायरल वीडियो और घटनाक्रम का विवरण:
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हाथ में तलवार: वायरल फुटेज में महिला हाथ में खुली तलवार लिए जलती चिता के बिल्कुल समीप खड़ी नजर आ रही है।
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विवादित बयान: वीडियो में वह स्पष्ट रूप से यह कहती सुनाई दे रही है कि ‘हम आज इंसान का मांस खाएंगे’। इसके उपरांत वह तलवार की नोक से चिता के भीतर से कुछ अंश निकालती है और उसका सेवन करने का दावा करती है।
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सोशल मीडिया पर वायरल: बताया जा रहा है कि यह वीडियो कथित तौर पर महिला द्वारा अपने ही निजी इंस्टाग्राम हैंडल से अपलोड किया गया था, जिसके बाद यह विभिन्न प्लेटफॉर्म्स पर वायरल हो गया। हालांकि, प्रशासनिक स्तर पर इस वीडियो की सत्यता की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि की जा रही है।
🚩 संत समाज ने जताया कड़ा ऐतराज: सनातन और अघोर परंपरा के उल्लंघन का आरोप
धार्मिक मर्यादा और अखाड़ों की प्रतिक्रिया:
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जूना अखाड़े की कड़ी आपत्ति: वीडियो सामने आते ही जूना अखाड़ा के महामंडलेश्वर शैलेशानंद गिरी महाराज समेत प्रमुख संतों और अघोर परंपरा के जानकारों ने इस कृत्य की तीखे शब्दों में निंदा की है।
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अंतिम संस्कार की मर्यादा: संतों का कहना है कि हिंदू धर्म में अंतिम संस्कार और मृत देह की एक तय पवित्र मर्यादा होती है।
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परंपरा के विपरीत: संतों ने स्पष्ट किया कि शास्त्रों और अघोर साधना के वास्तविक सिद्धांतों में इस प्रकार खुलेआम शव का अपमान करना पूरी तरह वर्जित और सनातन परंपरा के खिलाफ है।
⚖️ धार्मिक भावनाएं आहत करने का आरोप: पुलिस से FIR दर्ज करने की मांग
कानूनी कार्रवाई और संतों का रुख:
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शव के अपमान पर रोष: संतों का कहना है कि जलते हुए शव का इस प्रकार सार्वजनिक अपमान किसी भी दृष्टिकोण से स्वीकार्य नहीं है और इससे श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाएं गंभीर रूप से आहत हुई हैं।
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सख्त कार्रवाई की मांग: संत समाज ने स्थानीय पुलिस और जिला प्रशासन से अपील की है कि मामले का तत्काल संज्ञान लिया जाए, संबंधित महिला के विरुद्ध प्राथमिकी (FIR) दर्ज की जाए और कानून सम्मत सख्त कदम उठाए जाएं।


