अंबाला (हरियाणा): अंबाला स्थित ऐतिहासिक गुरुद्वारा पंजोखरा साहिब में गुरसिमरन सिंह मंड के साथ हुए विवाद का प्रकरण अब अत्यधिक तूल पकड़ता जा रहा है। मंड के साथ हुई मारपीट के मामले में पुलिस द्वारा सिख युवाओं की गिरफ्तारी किए जाने के विरोध में पंजोखरा साहिब परिसर में सिख समाज की एक अति आवश्यक (Gursimran Singh Mand Controversy) एवं वृहद बैठक आयोजित हुई। बैठक में पुलिस प्रशासन की एकतरफा कार्रवाई पर कड़ा रोष व्यक्त किया गया।
Gursimran Singh Mand Controversy – सिख समाज की महापंचायत के उपरांत सर्वसम्मति से दिल्ली-अमृतसर नेशनल हाईवे-44 (NH-44) को अनिश्चितकाल के लिए जाम करने का निर्णय लिया गया। जैसे ही सिख समुदाय के लोग पंजोखरा साहिब से हाईवे की दिशा में आगे बढ़े, पुलिस बल ने उन्हें मार्ग में रोकने का प्रयास किया। अंबाला से पंजोखरा की ओर जाने वाले मुख्य मार्ग पर स्थित एनसीसी (NCC) स्कूल के बाहर ही भारी पुलिस बल तैनात कर प्रदर्शनकारियों को रोक लिया गया।
गिरफ्तार युवाओं की रिहाई और मंड पर FIR दर्ज करने पर अड़ा सिख समाज
पुलिस कार्रवाई के कारण नेशनल हाईवे-44 पर वाहनों की आवाजाही पूरी तरह ठप हो गई, जिससे सड़कों पर कई किलोमीटर लंबा ट्रैफिक जाम लग गया। प्रदर्शनकारी सिख समाज के प्रतिनिधियों ने स्पष्ट मांग रखी है कि गुरसिमरन सिंह मंड के साथ हुई झड़प के आरोप में गिरफ्तार किए गए निर्दोष सिख युवाओं को तत्काल रिहा किया जाए और घटना की मूल वजह बने गुरसिमरन सिंह मंड के विरुद्ध प्राथमिकी (FIR) दर्ज की जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि जब तक उनकी मांगें पूर्ण नहीं होतीं, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
जानें क्या है पूरा विवाद
उल्लेखनीय है कि यह पूरा विवाद 7 अगस्त को हरियाणा के अंबाला स्थित ऐतिहासिक गुरुद्वारा पंजोखरा साहिब से प्रारंभ हुआ था। श्री गुरु हरकिशन साहिब जी के पावन प्रकाश पर्व के अवसर पर माथा टेकने पहुँचे अखिल भारतीय कीर्तन फेडरेशन (IAKTF) के राष्ट्रीय अध्यक्ष गुरसिमरन सिंह मंड की गाड़ी की चपेट में आने से एक ग्रंथ/पाठी का पैर घायल हो गया था। पाठी के पैर पर वाहन चढ़ाने की इस घटना से गुरुद्वारा परिसर में उपस्थित श्रद्धालु भड़क गए थे और उन्होंने इसका कड़ा विरोध जताया था, जिसके उपरांत विवाद ने हिंसक रूप ले लिया था।


