शिमला : पहाड़ी राज्य हिमाचल प्रदेश में इस वर्ष भी भीषण मानसूनी बारिश और भूस्खलन ने भारी तबाही मचाई है। प्राकृतिक आपदा के कारण जान-माल का भारी नुकसान हुआ है और कई प्रमुख संपर्क मार्ग पूरी तरह से टूट गए हैं, जिन्हें यातायात के लिए बंद करना पड़ा है। राज्य में 30 जून से 9 अगस्त के मध्य मानसून के (monsoon wreaks havoc in Himachal) कहर से कम से कम 157 लोगों की दर्दनाक मौत हो चुकी है, जबकि 257 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं।
monsoon wreaks havoc in Himachal – राज्य में पिछले कुछ सप्ताहों के दौरान हुई अतिवृष्टि के कारण भारी जनहानि दर्ज की गई है। कुल मृतकों में से 89 लोगों की जान मार्ग दुर्घटनाओं में गई, जबकि 68 लोगों की मृत्यु भूस्खलन (Landslide), डूबने, सर्पदंश और ऊंचाई से गिरने के कारण हुई। इस प्राकृतिक आपदा में सर्वाधिक 24 मौतें चंबा जिले में दर्ज की गईं। इसके अतिरिक्त कुल्लू और कांगड़ा जिलों में 21-21 लोगों की जान गई है। वहीं प्रदेश की राजधानी शिमला में 20 तथा जनजातीय क्षेत्रों स्पीति और लाहौल में 18-18 लोगों की मृत्यु हुई है।
हिमाचल के 5 जिलों में ऑरेंज अलर्ट
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, राज्य के कई संवेदनशील जिलों में आगामी दिनों में भी भारी बारिश का संकट बना हुआ है। मौसम विभाग ने राज्य के 5 प्रमुख जिलों के लिए ‘ऑरेंज अलर्ट’ जारी रखा है। हिमाचल प्रदेश सरकार के स्टेट इमरजेंसी ऑपरेशन्स सेंटर (SEOC) की अद्यतन रिपोर्ट के अनुसार, इस मानसूनी आपदा में लगभग 900 निजी संपत्तियों और सार्वजनिक निर्माण कार्यों को भारी क्षति पहुंची है, जिससे राज्य को अब तक करीब ₹886 करोड़ रुपये का आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है।


