नागौर/जयपुर : राजस्थान के नागौर जिले के बहुचर्चित ‘डांगावास हत्याकांड’ मामले में घटना के 11 वर्ष पश्चात अदालत का अत्यंत महत्वपूर्ण निर्णय सामने आया है। वर्ष 2015 में 23 बीघा विवादित भूमि के (Dangawas murder case) कब्जे को लेकर हुए खूनी संघर्ष और 5 दलितों की दर्दनाक मौत के मामले में विशेष अदालत ने सभी 40 आरोपियों को दोषमुक्त (बरी) कर दिया है।
जमीन विवाद में हुआ था खूनी तांडव
इस संवेदनशील मामले में एक तरफ जहां 5 दलितों की हत्या हुई थी, वहीं दूसरे पक्ष के भी एक व्यक्ति की गोली लगने से मृत्यु हो गई थी।तत्कालीन समय में दलित संगठनों के भारी विरोध और राजनीतिक दबाव के उपरांत इस केस की विवेचना सीबीआई को सौंपी गई थी। तथापि, सीबीआई द्वारा दाखिल आरोप पत्र (Charge-sheet) में चश्मदीद गवाहों के बयानों में परस्पर विरोधाभास, हत्या में प्रयुक्त हथियारों की बरामदगी न होना और मुख्य हमलावरों की स्पष्ट पहचान न हो पाना अदालत में सीबीआई के दावों पर भारी पड़ा।
1964 से जारी था 23 बीघा जमीन का विवाद
नागौर जिले के मेड़ता रोड थाना क्षेत्र अंतर्गत डांगावास गांव में 23 बीघा 5 बिस्वा जमीन के स्वामित्व व कब्जे को लेकर दो पक्षों के मध्य दशकों पुराना भूमि विवाद चला आ रहा था। विवादित भूमि वर्ष 1964 में मात्र ₹1,500 में चिमनाराम जाट के पास गिरवी रखी गई थी। चिमनाराम के देहावसान के बाद उनके पुत्रों कानाराम व ओमाराम का जमीन पर आधिपत्य रहा, परंतु कालांतर में रतनाराम मेघवाल ने जमीन पुनः प्राप्त करने के उद्देश्य से वहां झोपड़ी व पक्का कमरा निर्मित कर लिया था।
14 मई 2015 का खूनी तांडव
14 मई 2015 को लगभग 200 से 250 लोग ट्रैक्टर, मोटरसाइकिल एवं धारदार हथियारों के साथ विवादित खेत में जबरन घुस आए थे।इस भीषण हिंसक झड़प में रतनाराम, पोखरराम, पांचाराम, खेमाराम और गणपतराम मेघवाल (Dangawas murder case) की मौत हो गई थी, जबकि दूसरे पक्ष के रामपाल पुरी की भी गोली लगने से जान चली गई थी। इस घटना के बाद संपूर्ण प्रदेश में जातीय व राजनीतिक तनाव व्याप्त हो गया था।


