नई दिल्ली: देश में सड़क सुरक्षा और दुर्घटना पीड़ितों के अधिकारों को सुदृढ़ करने की दिशा में सुप्रीम कोर्ट ने एक अत्यंत महत्वपूर्ण एवं ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। जस्टिस संजय करोल और जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा की पीठ ने इंश्योरेंस रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी (IRDAI) तथा सड़क (without third party insurance fuel will not be available) परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) को एक विशेष पायलट प्रोजेक्ट तैयार करने के निर्देश दिए हैं। इस प्रोजेक्ट के तहत वाहनों के वैलिड थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस स्टेटस को फ्यूल (पेट्रोल/डीजल) पंपों से सीधे जोड़ा जाएगा, ताकि बिना वैध बीमा वाली गाड़ियों की त्वरित पहचान की जा सके और उन्हें तब तक ईंधन न दिया जाए जब तक वे बीमा न करवा लें।
without third party insurance fuel will not be available – सुप्रीम कोर्ट ने देश में वाहनों के इंश्योरेंस की बदहाल स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए आंकड़े उजागर किए। अदालत ने बताया कि देश के कुल 30.48 करोड़ पंजीकृत वाहनों में से लगभग 16.54 करोड़ (यानी करीब 56 प्रतिशत) वाहन बिना किसी इंश्योरेंस के सड़कों पर दौड़ रहे हैं। इसके परिणामस्वरूप सड़क दुर्घटना का शिकार होने वाले निर्दोष पीड़ितों अथवा उनके परिवारों को कानूनी अड़चनों के कारण समय पर वैधानिक मुआवजा प्राप्त नहीं हो पाता। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मोटर वाहन अधिनियम, 1988 की धारा 146 का मुख्य उद्देश्य पीड़ितों को लंबे मुकदमों से राहत दिलाकर तुरंत आर्थिक सहायता उपलब्ध कराना है।
🚗 नए चार-पहिया वाहनों के लिए 4 साल और दो-पहिया के लिए 6 साल अनिवार्य हुआ थर्ड-पार्टी कवर
सड़क सुरक्षा के व्यापक हित को ध्यान में रखते हुए उच्चतम न्यायालय ने नए वाहनों की अनिवार्य थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस अवधि को बढ़ाने का बड़ा फैसला किया है। वर्ष 2018 में कोर्ट ने नए चार-पहिया वाहनों हेतु 3 वर्ष तथा दो-पहिया वाहनों हेतु 5 वर्ष का कवर अनिवार्य किया था। अब 8 वर्ष उपरांत समीक्षा करते हुए कोर्ट ने नए 4-व्हीलर के लिए इस अवधि को 3 से बढ़ाकर 4 साल और 2-व्हीलर के लिए 5 से बढ़ाकर 6 साल करने का आदेश IRDAI को जारी किया है। इससे वाहन मालिकों को बार-बार नवीनीकरण की परेशानी से मुक्ति मिलेगी और सड़क पर बीमाहीन वाहनों की संख्या घटेगी।


