नई दिल्ली: साल 2020, तारीख 25 फरवरी और सांप्रदायिक हिंसा की आग में जलती देश की राजधानी दिल्ली। यह वही काली तारीख थी जब इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) के एक होनहार युवा अफसर अपने घर से निकलते हैं और कभी जिंदा वापस नहीं लौटते। अगले दिन चांद बाग इलाके के एक नाले से उनकी खून से लथपथ लाश (life imprisonment to 5 people including Tahir Hussain) बरामद होती है।जांच में शव की पहचान आईबी अफसर अंकित शर्मा के रूप में हुई।
life imprisonment to 5 people including Tahir Hussain – हमलावरों की नफरत और उन्माद ने देश से उसका होनहार लाल और परिवार से उनका बेटा छीन लिया। 6 साल तक चली लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद अब इस जघन्य हत्याकांड में आम आदमी पार्टी (AAP) के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन, अदनान, जावेद, नाजिम और कासिम को कड़कड़डूमा कोर्ट ने उम्रकैद (Life Imprisonment) की सख्त सजा सुनाई है। हालांकि, कोर्ट के इस कड़े फैसले पर ताहिर हुसैन ने इसे “मैच फिक्स” बताते हुए हाई कोर्ट जाने की बात कही है।
चश्मदीद गवाहों के बयान
पूछताछ में कई गवाहों ने सीधे तौर पर ताहिर हुसैन के बहुमंजिला मकान का जिक्र किया। अंकित शर्मा के पिता ने भी अपनी आधिकारिक शिकायत में ताहिर और उसके गुर्गों पर सीधा संदेह जताया था। इसके बाद जांच में खुलासा हुआ कि दंगों के दौरान ताहिर के घर की छत का इस्तेमाल एक ‘ऑपरेशन बेस’ की तरह किया जा रहा था, जहां से उपद्रवियों द्वारा गुलेल से पत्थर, कांच की बोतलें और एसिड/पेट्रोल बम बरसाए जा रहे थे। इसके बाद पूरी जांच का केंद्र ताहिर की इमारत और वहां मौजूद दंगाइयों पर केंद्रित हो गया।


