लातेहार (झारखंड): झारखंड का लातेहार जिला, जो कभी खतरनाक नक्सलियों के अभेद्य गढ़ और ‘प्रयोगशाला’ के रूप में कुख्यात था, अब पूरी तरह नक्सल मुक्त होने की कगार पर पहुंच गया है।
जिल्ले में सक्रिय टीएसपीसी (TSPC) और जेजेएमपी (JJMP) जैसे समानांतर नक्सली संगठनों का पुलिस और सुरक्षा बलों ने लगभग पूरी तरह खात्मा कर दिया है। वहीं, भाकपा माओवादी संगठन की कमर टूट चुकी है और जिले में अब महज दो इनामी नक्सली ही बचे हैं। लातेहार के पुलिस अधीक्षक (SP) कुमार गौरव का दावा है कि जल्द ही लातेहार जिला इतिहास में पहली बार पूरी तरह से नक्सलवाद से मुक्त घोषित हो जाएगा।
📜 5 साल पहले तक थी समानांतर हुकूमत, टीएसपीसी और जेजेएमपी की उदय स्थली था लातेहार
दरअसल, आज से महज 5 साल पहले तक लातेहार जिले के बड़े भू-भाग पर नक्सलियों और उग्रवादियों की तूती बोलती थी।
यह जिला माओवादियों के अलावा टीएसपीसी और जेजेएमपी का जन्मस्थान व सबसे मजबूत गढ़ माना जाता था, जहां उनका समानांतर वर्चस्व स्थापित था। हालांकि, बीते 4 वर्षों में लातेहार जिला पुलिस, सीआरपीएफ और कोबरा बटालियन द्वारा चलाए गए ताबड़तोड़ अभियानों के परिणामस्वरूप इन संगठनों के ज्यादातर शीर्ष कमांडर या तो मुठभेड़ में मारे गए, या जेलों में कैद हैं अथवा पुलिस के समक्ष सरेंडर कर चुके हैं।
🎯 भाकपा माओवादी के बचे हैं सिर्फ दो इनामी नक्सली, पुलिस की टीमें कर रही हैं लगातार तलाश
वर्तमान समय में लातेहार जिले में भाकपा माओवादी संगठन के केवल दो इनामी नक्सली ही सक्रिय बचे हैं।
इनमें 10 लाख रुपये का इनामी जोनल कमांडर मनोहर गंझू और 5 लाख रुपये का इनामी सब-जोनल कमांडर राजू भुइंया शामिल हैं। शेष सभी कैडर गिरफ्तार किए जा चुके हैं या सरेंडर कर चुके हैं। एसपी कुमार गौरव ने स्पष्ट कहा कि नक्सलियों के पास अब केवल आत्मसमर्पण का ही एकमात्र सुरक्षित विकल्प बचा है। यदि वे आत्मसमर्पण करते हैं तो उन्हें पुनर्वास नीति का पूरा लाभ मिलेगा, अन्यथा उनका सफाया तय है।
🪖 ‘ऑपरेशन डबल बुल’ (2022) ने तोड़ी थी उग्रवादियों की कमर, 18 दिनों तक चला था अभियान
लातेहार में नक्सलियों के पतन की वास्तविक शुरुआत वर्ष 2022 में तत्कालीन एसपी अंजनी अंजन के नेतृत्व में चलाए गए ऐतिहासिक ‘ऑपरेशन डबल बुल’ से हुई थी।
लोहरदगा और लातेहार की सीमा पर स्थित पेशरार व बुलबुल के अति-दुर्गम जंगलों में कोबरा बटालियन और झारखंड पुलिस ने लगातार 18 दिनों तक साझा ऑपरेशन चलाया। इस दौरान कई मुठभेड़ें हुईं, नक्सलियों के दर्जनों बंकर ध्वस्त किए गए और रवींद्र गंझू के 36 से अधिक हथियारों से लैस दस्ते को पूरी तरह से तीतर-बीतर कर दिया गया, जिससे उनकी सैन्य क्षमता तबाह हो गई।
🐘 ‘ऑपरेशन ऑक्टोपस’ से आजाद हुआ बूढ़ा पहाड़, ‘ऑपरेशन कांति’ में पकड़ा गया 20 लाख का इनामी रवींद्र गंझू
‘ऑपरेशन डबल बुल’ के तुरंत बाद 2022 में ही नक्सलियों के सबसे बड़े और सबसे सुरक्षित माने जाने वाले ट्रेनिंग सेंटर ‘बूढ़ा पहाड़’ को मुक्त कराने के लिए ‘ऑपरेशन ऑक्टोपस’ शुरू किया गया।
लगभग चार महीनों तक चले इस अभियान के तहत बिना किसी सुरक्षाबल के नुकसान के बूढ़ा पहाड़ से माओवादियों का कब्जा हमेशा के लिए खत्म कर दिया गया। इसके बाद महुआडांड़ इलाके में छिपकर गतिविधियां चला रहे इनामी कमांडर मनीष यादव को पुलिस ने मार गिराया। वहीं, ‘ऑपरेशन कांति’ चलाकर 20 लाख के सबसे खूंखार माओवादी कमांडर रवींद्र गंझू को गिरफ्तार कर लिया गया, जिसके बाद उसके साथी सुखलाल बृजिया और अनिल तुरी ने भी पुलिस के आगे घुटने टेक दिए।


