ब्रेंट क्रूड की कीमतें अपने पीक से 40 फीसदी तक नीचे आ चुकी हैं, लेकिन भारतीय शेयर बाजार में अपेक्षित तेजी गायब है। बाजार पर अब ग्लोबल ऑयल शॉक के बजाय ‘सुपर अल नीनो’ का खतरा मंडरा रहा है। मानसून की पिछले एक दशक में सबसे कमजोर शुरुआत ने भारत की 56 फीसदी जीडीपी (जो खपत से जुड़ी है) को (Indian Stock Market News) खतरे में डाल दिया है। जानकारों के अनुसार, अब बाजार के लिए बड़ा रिस्क कच्चे तेल की सप्लाई नहीं, बल्कि घरेलू मांग में कमी है।
पिछले दो सालों से निफ्टी 50 ने निवेशकों को कोई खास रिटर्न नहीं दिया है और आगे की स्थिति भी अनिश्चित है। 26 जून, 2026 तक बारिश का आंकड़ा लॉन्ग-टर्म एवरेज (LTA) से 42 फीसदी कम रहा है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने भी मानसून का अनुमान घटाकर 90 फीसदी कर दिया है, जो पिछले 11 सालों में सबसे कमजोर अनुमान है। चूंकि भारत का 46 फीसदी वर्कफोर्स खेती पर निर्भर है, इसलिए यह स्थिति रूरल इकोनॉमी के लिए किसी बड़े झटके से कम नहीं है।
Indian Stock Market News – ब्रोकरेज हाउस इस स्थिति को देखते हुए कोर सेक्टर की रेटिंग घटा रहे हैं। ‘पीएल कैपिटल’ ने कंज्यूमर सेक्टर में अपना वेटेज कम किया है और महिंद्रा एंड महिंद्रा (M&M) जैसे शेयरों में भी जोखिम की चेतावनी दी है। ‘एमकैपिटल’ की रिपोर्ट के अनुसार, भारत इस बार कम सुरक्षा उपायों (बफर्स) के साथ मंदी की ओर बढ़ रहा है। आरबीआई के पास भी महंगाई और गिरते रुपये के कारण अर्थव्यवस्था को सहारा देने की सीमित गुंजाइश बची है।


