नारायणपुर जिले का गारपा गांव, जो कभी नक्सलवाद और भय का पर्याय माना जाता था, आज शांति और विकास की नई राह पर है। मंगलवार को इसी गांव में ‘सुशासन तिहार’ का आयोजन किया गया, जिसमें मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने शिरकत की। एक भावनात्मक और आत्मीय माहौल में मुख्यमंत्री ने पेड़ की छांव के नीचे खाट पर (happiness came to Abujhmad) बैठकर ग्रामीणों से संवाद किया।
🏠 पलायन का दौर खत्म, घर लौट रहे ग्रामीण
संवाद के दौरान ग्रामीण दसरू राम ने भावुक होकर बताया कि एक समय था जब लोग अपनी जान बचाने के लिए गांव, खेत और घर छोड़कर शहरों की ओर पलायन कर गए थे। लेकिन अब हालात (happiness came to Abujhmad) पूरी तरह बदल चुके हैं। जो लोग कभी डर के कारण भाग गए थे, वे अब वापस लौटकर नया जीवन शुरू कर रहे हैं।
इसे भी पढ़ें – वन अधिकार अधिनियम पर नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत का राष्ट्रपति को पत्र; आदिवासियों के अधिकारों का मुद्दा गरमाया
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने ग्रामीणों की सभी मांगों को गंभीरता से सुना और उन्हें पूरा करने का भरोसा दिलाया। उन्होंने कहा कि सरकार अबूझमाड़ के सर्वांगीण विकास के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। कार्यक्रम के दौरान गांव के नन्हे बच्चों ने अपनी कला और कविताओं के माध्यम से मुख्यमंत्री का स्वागत किया, जिसने वहां मौजूद सभी लोगों को भावुक कर दिया। मुख्यमंत्री ने बच्चों की प्रतिभा को सराहा और उनके उज्ज्वल भविष्य का आशीर्वाद दिया।
✨ विकास की नई उम्मीदों का उत्सव
गारपा गांव में आयोजित यह ‘सुशासन तिहार’ मात्र एक सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि ग्रामीणों के बदले हुए जीवन और सरकार के प्रति लौटते विश्वास का उत्सव था। अबूझमाड़ अब केवल नक्सल गतिविधियों के लिए नहीं, बल्कि विकास, विश्वास और नई संभावनाओं के लिए जाना जा रहा है। गारपा की यह सफलता कहानी अन्य गांवों के लिए भी एक मिसाल बन रही है।


