मध्य प्रदेश के सतना जिले से एक बेहद हैरान करने वाला मामला सामने आया है. यहां उचेहरा के अतराबेदिया गांव में रहने वाले रामलोटन कुशवाहा ने जीवित रहते हुए अपनी तेरहवीं और (decision of body donation) वरसी (मृत्यु के बाद किए जाने वाले संस्कार) आयोजित करने का ऐलान किया है. इस अजीबोगरीब फैसले ने न केवल गांव बल्कि पूरे जिले में चर्चा का विषय बना दिया है.
decision of body donation – रामलोटन कुशवाहा ने कुछ समय पहले एक नेक इरादे से यह घोषणा की थी कि उनकी मृत्यु के बाद उनका शरीर सतना के सरकारी मेडिकल कॉलेज को दान कर दिया जाए. उनके इस फैसले का सम्मान होने के बजाय, समाज के कुछ लोगों ने उनका मजाक उड़ाना शुरू कर दिया. लोगों ने तंज कसते हुए यहां तक कह दिया कि उन्होंने देहदान का फैसला इसलिए लिया है ताकि मरने के बाद होने वाले अंतिम संस्कार और तेरहवीं के खर्चों से बचा जा सके.
बांटे जा रहे हैं शोक-संदेश कार्ड
लोगों के इन तानों से आहत होकर रामलोटन ने एक साहसी और अनोखा रास्ता चुना. उन्होंने तय किया कि वह अपने जीते-जी अपनी तेरहवीं का भोज आयोजित करेंगे ताकि कोई यह न कह सके कि उन्होंने पैसे बचाने के लिए देहदान किया है. इसके लिए उन्होंने बाकायदा शोक-संदेश वाले आमंत्रण पत्र (कार्ड) छपवाए हैं. इन कार्डों पर 13 मई की तारीख तय की गई है और वह अपने रिश्तेदारों, ग्रामीणों और परिचितों को इस ‘मृत्यु भोज’ में शामिल होने के लिए आमंत्रित कर रहे हैं.


