गुजरात में पतंग उत्सव की मस्ती के बीच दो दिन (14-15 जनवरी) को मांझे की चपेट में आने से छह लोगों की मौत हो गई. वहीं आठ लोग गंभीर रूप से घायल हो गए, जिनका विभिन्न अस्पतालों में इलाज (Manjha is weaving web of death) चल रहा है. कई शहरों में मांझे की वजह से लोगों के घायल होने की घटनाएं हुईं. अब तक 805 इमरजेंसी कॉल दर्ज की गई हैं. हालांकि पिछले साल की तुलना में इस साल इमरजेंसी मामलों में कमी आई है.
गुजरात में एक बार फिर पतंग का मांझा मौत का मांझा बनकर सामने आया. मकर संक्रांति के दिन सूरत में मांझे की चपेट में आने से चार लोगों की मौत हो गई. वहीं भरूच के जंबूसर के पिलुदरा गांव में पतंग के मांझे से गला कटने से एक युवक की मौत हो गई. बाइक से जा रहे युवक की गर्दन मांझे से कट गई. घायल युवक को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन इलाज के दौरान उसने दम तोड़ दिया.
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दूसरी ओर, अरावली में पतंग की डोर से गला गला कटने से एक नाबालिग की मौत हो गई. बयाड के चोइला गांव में मोपेड चला रहे 17 साल के तीर्थ नाम के एक लड़के का मांझे से गला कट गया. लड़के को गंभीर हालत में अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया.
Manjha is weaving web of death – उत्तरायण (मकर संक्रांति) का त्योहार कई परिवारों में मातम लेकर आया है. सूरत में पतंग की डोर की वजह से हुए अलग-अलग हादसों में 4 लोगों की जान चली गई. सूरत में एक परिवार के पति, पत्नी और बेटी की पुल से गिरने से मौत हो गई, जबकि एक युवक की गर्दन में डोर फंसने से मौत हो गई.


