गीता जयंती वह पवित्र अवसर है, जब भगवान श्रीकृष्ण ने महाभारत के युद्ध के समय अर्जुन को धर्म, भक्ति और कर्म का दिव्य उपदेश दिया था. इस दिन भगवद् गीता के माध्यम से जीवन में उचित निर्णय, मानसिक संतुलन और आध्यात्मिक मार्गदर्शन प्राप्त करने की प्रेरणा मिलती है. गीता जयंती हर (Geeta Jayanti) वर्ष मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी को मनाई जाती है.
Geeta Jayanti – वर्ष 2025 में यह पवित्र दिन 01 दिसंबर यानी आज पड़ी है. इस दिन श्रद्धालु, संत और विद्वान भगवान श्रीकृष्ण के उपदेशों का पाठ, अध्ययन और मंत्र-जप करते हैं, जिससे मन, बुद्धि और कर्म का मार्ग शुद्ध होता है और जीवन में ज्ञान, भक्ति और स्थिरता आती है.
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गीता जयंती का मुख्य उद्देश्य साधकों के मन, बोल और कर्म को सही दिशा में मार्गदर्शित करना है. भगवद् गीता में जीवन के हर पहलू के लिए ज्ञान और सही तरीके बताए गए हैं, ताकि व्यक्ति अपने कर्तव्यों और धर्म को समझ सके. कहा जाता है कि गीता का पाठ करने से व्यक्ति का मन शांत और संयमित रहता है, बुद्धि स्पष्ट और निर्णय लेने की क्षमता मजबूत होती है, और आत्मविश्वास बढ़ता है.
गीता जयंती के अवसर पर कुछ विशेष मंत्र और श्लोक पढ़ने का विधान है. इनमें प्रमुख है ॐ नमो भगवते वासुदेवाय का जप, जो भगवान विष्णु और श्रीकृष्ण की भक्ति में अत्यंत शुभ माना गया है. इसके अलावा भगवद् गीता के अध्याय 2 और 12 के श्लोक भी विशेष रूप से पढ़े जाते हैं. अध्याय 2 में कर्म, धर्म और जीवन की सार्थकता का मार्गदर्शन मिलता है, जबकि अध्याय 12 में भक्ति मार्ग और भगवान की आराधना का महत्व बताया गया है.

