मुंबई की PMLA कोर्ट ने 23,000 करोड़ रुपये के पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) धोखाधड़ी मामले के केंद्र में रही कंपनी गीतांजलि जेम्स लिमिटेड के भगोड़े कारोबारी मेहुल चोकसी पर एक्शन लिया है. कोर्ट (big blow to Mehul Choksi) ने चोकसी से जुड़ी 13 असुरक्षित संपत्तियों का मूल्यांकन और नीलामी करने की अनुमति दे दी है.
इन संपत्तियों में बोरीवली में चार आवासीय फ्लैट, बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स में भारत डायमंड बोर्स में कार्यालय परिसर, गोरेगांव पूर्व में विरवानी औद्योगिक एस्टेट में चार औद्योगिक इकाइयां, जयपुर विशेष आर्थिक क्षेत्र में स्थित चांदी की ईंटें, अर्ध-कीमती पत्थर और आभूषण बनाने वाली मशीनें शामिल हैं. निर्देश दिया है कि बिक्री से प्राप्त राशि को मनी लांड्रिंग मामले के समाप्त होने तक कोर्ट के नाम से फिक्स डिपॉजिट के रूप में रखा जाए.
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दरअसल, 4 नवंबर के आदेश में, विशेष न्यायाधीश एवी गुजराती ने इस साल फरवरी में राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) द्वारा नियुक्त परिसमापक शांतनु रे की अर्जी स्वीकार कर ली. गीतांजलि जेम्स, 13,000 करोड़ रुपये के पंजाब नेशनल बैंक धोखाधड़ी मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की जांच में शामिल केंद्रीय संस्थाओं में से एक है, जिसमें चोकसी को भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित किया गया है. शांतनु रे ने ईडी मामले में कुर्क की गई असुरक्षित संपत्तियों के निपटान की अनुमति मांगी थी.
big blow to Mehul Choksi – कोर्ट ने अपने फैसले में यह स्पष्ट किया कि केवल असुरक्षित संपत्तियों की ही नीलामी की जा सकती है, जिन पर सुरक्षित लेनदारों का दावा नहीं है. अदालत ने इस बात पर भी जोर दिया कि ईडी द्वारा संपत्तियों की कुर्की बरकरार रहेगी और आय का स्वामित्व और जब्ती मुकदमे के बाद ही तय की जाएगी. आदेश में कहा गया है, खर्चों में कटौती के बाद बिक्री से प्राप्त राशि को इस न्यायालय के नाम आईसीआईसीआई बैंक में फिक्स्ड डिपॉजिट के रूप में जमा किया जाएगा.

