Kisan Andolan Live: तीन कृषि कानूनों के विरोध दिल्ली के पृथक बॉर्डरों पर 75 दिनों से धरना दे रहे किसान संगठनों ने राज्यसभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की टिप्पणी कि देश में आंदोलनकारियों की नई नस्ल उभरी है, जिसे आंदोलनजीवी कहा जाता है, पर आपत्ति जताई है। किसान नेताओं ने कहा कि सरकारसार्थक वार्ता के अगले दौर की तारीख तय करे। प्रधानमंत्री ने सदन में किसानों को आंदोलन समाप्त करने व वार्ता करने के लिए कहा है। किसान संगठनों के शीर्ष नेतृत्व संयुक्त किसान मोर्चा के नेता व भाकियू के प्रवक्क्ता राकेश टिकैत ने प्रधानमंत्री की टिप्पणी कि नया समुदाय उभरा है जोकि प्रदर्शनों मे लिप्त है, पर कहा कि हांइस बारयह किसान समुदाय है जोकि उभरा है और लोग किसानों को अपना समर्थन दे रहे हैं। मोर्चा के वरिष्ठ नेता गुरनाम सिंह चढूनी ने कहा कि किसान इतने दिनों से दिल्ली बॉर्डर पर बैठे हैं, पहली बार प्रधानमंत्री ने बातचीत करने का आह्वान किया है। सरकार बात करना चाहती है तो किसानों को बुला लें, मोर्चा के नेता बात करने को तैयार है।

सरकार 11 दौर की वार्ता में कोई हल नहीं निकाल सकी है। इतने दिनों में 200 किसान शहीद हो चुके हैं, लेकिन सरकारहठधर्मिता पर अड़ी है। कृषि मंत्री नरेंद्र तोमार के बयान कृषि कानून में काला क्या है कि टिप्णणी पर किसान नेता चढूनी ने कहा कि काले मन से कानून बनाए गए हैं। सरकार अगर 2024 तक कानून वापस नहीं लेती है तो किसान 2024 तक बॉर्डर पर धरने पर बैठे रहेंगे। मोर्चा के नेता शिव कुमार कक्का ने कहा कि प्रधानमंत्री ने वार्ता के लिए कहा है तो सरकार को अगली तारीख तय करनी चाहिए। मोर्चा ने सरकार के बुलावे पर हमेशा वार्ता की है। संयुक्त किसान मोर्चा के सदस्य अभिमन्यु कोहाड़ ने कहा कि सरकार पहले ही बार बार कह चुकी है कि एमएसपी जारी है और जारी रहेगा। अगरसरकारदावा करती है तो एमएसपी पर कानूनी गारंटी क्यों नहीं देती है।
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देश मे भूख पर व्यापार नहीं होने देंगे – टिकैत
Kisan Andolan Live: भाकियू नेता राकेश टिकैत का कहना है कि देश में भूख परव्यापारनहीं होने देंगे। भूख से व्यापार करने वालों को बाहर निकाला जाएगा। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार विमान कंपनियां एक ही दिन में फ्लाइट का अलग-अलग किराया वसूलती हैं उसी तरह अनाज पर कॉरपोरेट का कब्जा होने पर भूख पर व्यापार करने की तैयारी है। जिसको जितनी भूख होगी उसे उतनी अधिक राशि खर्च करनी होगी। टिकैत ने कहा कि ऐसा होने नहीं दिया जाएगा। सोमवार को यूपी गेट बॉर्डर पर प्रधानमंत्री के संसद में दिए संबोधन के बाद भाकियू राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा कि पहले आंदोलन को पंजाब का बताया गया फिर एक विशेष जाति का बताया गया, लेकिन यह देश के किसानों का आंदोलन है। कर्नाटक औरकेरल तक के किसान इस आंदोलन में शामिल हैं। ऐसे में यह क्षेत्र या जाति के आधार पर कैसे बांटा जा सकता है। प्रधानमंत्री के इस बयान परकि कृषि मंत्री लगातार किसान नेताओं से बात कर रहे हैं राकेश टिकैत ने कहा कि हां बात कर रहे होंगे। हमारा संयुक्त मोर्चा बात करेगा। हमने बातचीत के दरवाजे बंद नहीं किए हैं।
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