कृषि क़ानून पर आज बैठक: कृषि से जुड़े तीन कानूनों के खिलाफ किस किसान आंदोलन का आज 35व दिन है सरकार और किसानों के बीच 21 दिन बाद आज सातवें दौर की बातचीत होगी इससे पहले 6 दौर की बातचीत में कोई हल नहीं निकल सका है
किसान तीनों कानूनों को रद्द करने की मांग पर अड़े हैं उधर सरकार लिखित में किसानों को जवाब देने को तैयार हैं लेकिन आखिर क्या वजह है कि इतने दिन और इतनी बातचीत का भी कोई हल नहीं निकल सका पहले की बातचीत में क्या हुआ किसान की मांग पर अड़े हैं। सबसे पहले किसान और सरकार के बीच अब तक हुई बातचीत में क्या-क्या निकला

पहला दौर: 14 अक्टूबर को मीटिंग में कृषि कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर की जगह कृषि सचिव आए किसान संगठनों ने मीटिंग का बायकाट कर दिया वह कृषि मंत्री से ही बात करना चाहते थे
13 नवंबर दूसरा दौर: कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर और रेल मंत्री पीयूष गोयल ने किसान संगठनों के साथ मीटिंग की 7 घंटे तक बातचीत चली लेकिन इसका भी कोई नतीजा नहीं निकल पाया और 3 घंटे तक बातचीत हुई

तीसरा दौर: सरकार ने एक्सपर्ट कमेटी बनाने का सुझाव दिया लेकिन किसान संगठनों को रद्द करने की मांग पर ही रहे
3 दिसंबर बातचीत का चौथा दौर: 7:30 घंटे तक बातचीत चली लेकिन सरकार ने वादा किया कि मैं सभी से कोई छेड़छाड़ नहीं होगी किसानों का कहना था सरकार में स्लीपर गारंटी देने के साथ-साथ तीनों कानूनों को भी रद्द करें
5 दिसंबर को पांचवें दौर की बातचीत सरकार एमएससी पर लिखित गारंटी देने को तैयार हुई लेकिन किसानों ने साफ कह दिया कि कानून रद्द करने पर सरकार को हां या ना में ही जवाब देना चाहिए नहीं तो आगे कोई बातचीत नहीं होगी

8 दिसंबर को छठवां दौर: भारत बंद के दिन ही गृह मंत्री अमित शाह ने बैठक की अगले दिन सरकार ने 22 पेज का प्रस्ताव दिया लेकिन किसान संगठनों ने इसे ठुकरा दिया सरकार के प्रस्ताव में क्या था
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9 दिसंबर को सरकार के 22 पेज के प्रस्ताव में कुछ यह पॉइंट थे :
एमएससी पर खरीद जारी रहेगी सरकार यह लिखित में देने को तैयार थी
कृषि क़ानून पर आज बैठक: किसान और कंपनी के बीच कॉन्ट्रैक्ट की रजिस्ट्री 30 दिन के भीतर होगी कॉन्ट्रैक्ट कानून में साफ कर देंगे कि किसान की जमीन पर लोन या गिरवी नहीं रख सकते
राज्य सरकारें चाहें तो प्राइवेट मंडियों पर भी फीस लगा सकती हैं इसके अलावा सरकार चाहे तो मंडी व्यापारियों का रजिस्ट्रेशन भी कर सकती हैं
किसान की जमीन कुर्की नहीं हो सकेगी किसान को सिविल कोर्ट जाने का विकल्प भी मिलेगा

बिजली बिल अभी ड्राफ्ट है इसे नहीं लाएंगे और पुरानी व्यवस्था ही लागू रहेगी तो फिर किसानों ने इसे ठुकरा दिया
किसान नेताओं का कहना है कि 22 में से 12 पेजों पर इसकी भूमिका के फायदे आंदोलन खत्म करने की अपील और धन्यवाद है
इसके अलावा सरकार ने कुछ नहीं लिखा कानूनों में क्या-क्या संशोधन करेंगे उसकी वजह हर मुद्दे पर लिखा है कि ऐसा करने पर विचार कर सकते हैं विचार किया क्यों नहीं जा सकत

कृषि क़ानून पर आज बैठक: तीनों कानूनों को रद्द करने के जवाब में हां या ना में जवाब देने की जगह लिखा है कि किसान के कोई और सुझाव होंगे तो उन पर भी विचार किया जा सकता है
किसानों की मांग है क्या किसान खेती से जुड़े तीनों कानूनों को रद्द करने की मांग कर रहे हैं उनका कहना है कि कानूनों से कॉरपोरेट घरानों को फायदा मिलेगा

किसान एमएसपी पर सरकार की तरफ से लिखित आश्वासन चाहते हैं
बिजली बिल का विरोध है सरकार 2003 के बिजली कानून को संशोधित करने का कानून लाने की तैयारी कर रही है किसानों का कहना है कि इससे किसानों को बिजली पर मिलने वाली सब्सिडी खत्म हो जाएगी और सिंचाई महंगी हो जाएगी
किसानों की एक मांग पराली जलाने वाले पर लगने वाले जुर्माने का प्रस्ताव हटाने का भी है इसके तहत पराली जलाने पर किसान को 5 साल तक की जेल 1करोड़ रुपए तक का जुर्माना लग सकता है।

आखिरकार बातचीत का हल निकल क्यों नहीं रहा
किसानों की जिद: तीनों कानून रद्द करने की मांग पर अड़े हैं किसान संगठनों का कहना है कि जब तक सरकार कानून रद्द नहीं करती तब तक आंदोलन चलता रहेगा
सरकार की जिद: क्या है कानून को वापस नहीं लेंगे और नारद करेंगे किसानों के जो भी सुझाव होंगे उस हिसाब से इसमें संशोधन करेंगे

