दुनिया में एक बार फिर तेल संकट गहराने की आशंका जताई गई है। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) ने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़कर बड़े युद्ध का रूप लेता है, तो इसका सीधा असर पूरी दुनिया की तेल सप्लाई और ईंधन की कीमतों पर पड़ सकता है। IEA का कहना है कि फिलहाल वैश्विक तेल बाजार (will inflation increase again) धीरे-धीरे स्थिर हो रहा है, लेकिन पश्चिम एशिया (West Asia) में बढ़ता तनाव इस सुधार को कभी भी पलट सकता है। यदि इस क्षेत्र में तेल उत्पादन या समुद्री मार्ग प्रभावित होते हैं, तो दुनिया भर में कच्चे तेल की सप्लाई घट सकती है और पेट्रोल-डीजल महंगे हो सकते हैं।

 हॉर्मुज स्ट्रेट का बंद होना है सबसे बड़ी चिंता

IEA के मुताबिक, सबसे बड़ा खतरा हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से जुड़ा है, जो दुनिया के सबसे जरूरी समुद्री तेल मार्गों में से एक है। रिपोर्ट के अनुसार, अगर हॉर्मुज मार्ग बंद हो जाता है, तो रोजाना लगभग 1.4 करोड़ बैरल कच्चे तेल की सप्लाई ठप हो सकती है। इतनी बड़ी मात्रा में सप्लाई रुकने से दुनिया भर में ईंधन की कमी पैदा हो सकती है और तेल की कीमतों में तेज उछाल आने की संभावना है।

will inflation increase again – पश्चिम एशिया दुनिया के सबसे बड़े कच्चे तेल निर्यातक क्षेत्रों में शामिल है। इसलिए, इस इलाके में किसी भी तरह का सैन्य संघर्ष केवल क्षेत्रीय ही नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर असर डालेगा। यदि तेल उत्पादक देशों का उत्पादन घटता है या जहाजों की आवाजाही बाधित होती है, तो कच्चे तेल की उपलब्धता कम हो जाएगी। इसका सीधा असर पेट्रोल, डीजल, विमान ईंधन (ATF) और गैस की कीमतों पर पड़ेगा, जिससे आम लोगों की जेब पर बोझ बढ़ेगा और महंगाई में उछाल आएगा।

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