कांग्रेस ने अपने भविष्य की सियासी दशा और दिशा को तय करने के लिए बीजेपी के सबसे मजबूत गढ़ गुजरात को चुना है. कांग्रेस का दो दिवसीय अधिवेशन गुजरात के अहमदाबाद में (Rahul’s political experiment) मंगलवार से शुरू हो रहा है. कांग्रेस की देश के तीन राज्यों में सरकार है. गर्मी के लिहाज से हिमाचल प्रदेश कांग्रेस के लिए सबसे मुफीद जगह हो सकती थी और चुनाव के मद्देनजर बिहार अहम हो सकता था. वह सब छोड़कर कांग्रेस ने बीजेपी की राजनीतिक प्रयोगशाला माने जाने वाले गुजरात को अपने पॉलिटिकिल एक्समेरिमेंट के लिए चुना है.
कांग्रेस की रणनीति अधिवेशन के बहाने महात्मा गांधी व सरदार पटेल की विचारधारा के दम पर अपना सियासी वनवास खत्म करने की है. अधिवेशन के पहले दिन मंगलवार को सरदार वल्लभभाई पटेल राष्ट्रीय स्मारक में सीडब्ल्यूसी की बैठक होगी. इसमें देशभर के 262 कांग्रेसी नेता शिरकत करेंगे, जिसकी अध्यक्षता मल्लिकार्जुन खरगे करेंगे. अधिवेशन के दूसरे दिन बुधवार को साबरमती रिवरफ्रंट पर कांग्रेसी सीडब्ल्यूसी के सदस्यों के अलावा प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष, कांग्रेस शासित प्रदेशों के मुख्यमंत्री और कुछ वरिष्ठ नेता शामिल होंगे.
Rahul’s political experiment – कांग्रेस के नेता इस बात पर लगातार जोर देते नजर आ रहे हैं कि बीजेपी भले ही पटेल की विरासत पर दावा कर रही हो, लेकिन महात्मा गांधी की हत्या के बाद आरएसएस पर प्रतिबंध पटेल ने ही लगाया था. संदेश यह है कि कांग्रेस महात्मा और सरदार की धरती से बीजेपी को चुनौती देने का संकल्प ले रही है. कांग्रेस ने पार्टी के राष्ट्रीय अधिवेशनों के ऐतिहासिक फोटो को चुनते हुए एक वार्षिक कलैंडर जारी किया है, इसमें गांधी, सरदार, पंडित नेहरू, सुभाष चंद्र बोस आदि नेताओं के अलग-अलग अधिवेशन के फोटो को प्रमुखता से दिखाया गया है. ऐसे में महात्मा गांधी और सरदार पटेल की जन्मभूमि पर कांग्रेस किसी भी सूरत में खुद को मजबूत करना चाहती है.

