व्हाट्सएप की एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन की दावों पर अब कानूनी सवाल खड़े हो गए हैं. अमेरिका में दर्ज एक नए मुकदमे में Meta पर आरोप लगाया गया है कि वह यूजर्स को मैसेज प्राइवेसी को लेकर (WhatsApp Privacy Case) गुमराह कर रही है. शिकायत में कहा गया है कि WhatsApp मैसेज पूरी तरह निजी नहीं हैं और कंपनी उन्हें स्टोर और एक्सेस कर सकती है.
व्हाट्सएप अपनी पहचान एक सुरक्षित और प्राइवेट मैसेजिंग ऐप के तौर पर करता रहा है. कंपनी का दावा है कि एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन के चलते मैसेज सिर्फ भेजने और पाने वाले ही पढ़ सकते हैं. ऐप के हर चैट की शुरुआत में यह साफ लिखा होता है कि व्हाट्सएप भी इन मैसेज को नहीं देख सकता. यही भरोसा व्हाट्सएप की सबसे बड़ी ताकत माना जाता है.
इसे भी पढ़ें – अमेरिका में टला टिकटॉक पर बैन का खतरा, बाइटडांस ने अमेरिकी कंपनियों के साथ फाइनल की बड़ी डील
शिकायत के मुताबिक मेटा और व्हाट्सएप यूजर्स के मैसेज को स्टोर करते हैं और उनका एनालिसिस भी कर सकते हैं. आरोप है कि कंपनी के पास यूजर कम्युनिकेशन तक पहुंच की तकनीकी क्षमता है. इस मुकदमे में कहा गया है कि व्हाट्सएप को पूरी तरह प्राइवेट बताकर दुनियाभर के यूजर्स को गुमराह किया गया. ऑस्ट्रेलिया, भारत, ब्राजील, मैक्सिको और साउथ अफ्रीका के यूजर्स इस केस का हिस्सा हैं.
WhatsApp Privacy Case – मेटा ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है. कंपनी का कहना है कि व्हाट्सएप पिछले 10 सालों से Signal प्रोटोकॉल पर आधारित एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन इस्तेमाल कर रहा है. मेटा के प्रवक्ता एंडी स्टोन ने कहा कि यह मुकदमा पूरी तरह निराधार और कल्पना पर आधारित है. कंपनी ने साफ किया है कि वह इस केस का आक्रामक तरीके से सामना करेगी और आरोप लगाने वालों के खिलाफ कार्रवाई भी कर सकती है.


