कोलकाता/नई दिल्ली: उत्तराखंड के बाद अब पश्चिम बंगाल में भी समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने की दिशा में प्रक्रिया आगे बढ़ती दिखाई दे रही है। प्रस्तावित कानून का मसौदा (West Bengal UCC Bill Draft) तैयार करने के लिए गठित राज्य की उच्चस्तरीय यूसीसी समिति की पहली महत्वपूर्ण बैठक नई दिल्ली स्थित पश्चिम बंगाल राज्य अतिथिगृह में आयोजित की गई।
आम जनता से मांगे जाएंगे सुझाव
समिति कानून के निर्माण में आम नागरिकों की राय और सुझावों को भी शामिल करेगी। इसके लिए जल्द ही एक आधिकारिक वेब पोर्टल तैयार किया जा रहा है और विशेष ईमेल आईडी जारी की जाएगी। समिति इसी महीने समाचार पत्रों में सार्वजनिक विज्ञापन कर नागरिकों से सुझाव और आपत्तियां आमंत्रित करेगी, जिसके लिए एक निश्चित समय सीमा तय की जाएगी।
अनुसूचित जनजातियों को मिल सकती है पूर्ण छूट
प्राप्त जानकारी के अनुसार, राज्य सरकार अनुसूचित जनजातियों को इस कानून के दायरे से बाहर रख सकती है,जिससे उनके पारंपरिक व सांस्कृतिक रीति-रिवाजों में कोई प्रशासनिक हस्तक्षेप न हो।प्रस्तावित संहिता के अंतर्गत विभिन्न समुदायों के तहत लागू कम से कम 13 पुराने मैरिज एक्ट्स को समाप्त करके उनकी जगह एक साझा और एकीकृत विवाह अधिनियम लाया जा सकता है।
बहुविवाह पर रोक और समान उत्तराधिकार नियम
प्रस्तावित कोड के अनुसार, लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाले (West Bengal UCC Bill Draft) पार्टनर्स के लिए अपनी पार्टनरशिप का विधिवत रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य किया जा सकता है। इसका उल्लंघन करने पर दंडात्मक कार्रवाई का प्रावधान रहेगा। बंगाल यूसीसी के तहत बहुविवाह की प्रथा पर पूर्ण रोक लगाने का प्रस्ताव शामिल किया जा रहा है। नए मसौदे में विवाह, तलाक, भरण-पोषण (गुजारा भत्ता), बच्चों की कस्टडी और पैतृक संपत्ति के उत्तराधिकार से जुड़े नियम सभी धर्मों व समुदायों के नागरिकों के लिए पूरी तरह समान किए जाएंगे।


