पहले सीपीएम और फिर टीएमसी का दामन थामने वाले ऋतब्रत बनर्जी ने छात्र नेता के रूप में अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत की थी। कोलकाता के साउथ प्वाइंट हाई स्कूल, आशुतोष कॉलेज और कलकत्ता यूनिवर्सिटी के पूर्व छात्र ऋतब्रत साल 2000 में उस समय सुर्खियों में आए, जब उनकी उम्र करीब 21 वर्ष थी। उन्हें CPI(M) के छात्र संगठन SFI का अखिल भारतीय महासचिव बनाया गया, जहां उन्होंने आठ साल तक संगठन का नेतृत्व किया। सीताराम (Ritabrata Banerjee becomes leader of opposition) येचुरी के करीबी होने की वजह से सीपीएम में ऋतब्रत का उदय काफी तेजी से हुआ।
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Ritabrata Banerjee becomes leader of opposition – सीपीएम में युवा चेहरों को आगे न बढ़ाने की परंपरा के बावजूद, ऋतब्रत का कद लगातार बढ़ता गया। परिणाम यह रहा कि 2014 में मात्र 34 साल की उम्र में वे राज्यसभा सांसद बन गए। हालांकि, 2017 में पार्टी विरोधी गतिविधियों और उनकी जीवनशैली को लेकर सीपीएम ने उन्हें पहले सस्पेंड किया और बाद में निष्कासित कर दिया। इसके बाद 2018 में उन्होंने टीएमसी का दामन थाम लिया और पार्टी की ट्रेड यूनियन शाखा के प्रमुख बने। 2024 में टीएमसी ने उन्हें राज्यसभा भेजा और 2026 के विधानसभा चुनाव में उलुबेरिया पुरबा सीट से शानदार जीत ने उन्हें राज्य की राजनीति का बड़ा चेहरा बना दिया।
ममता बनर्जी के लिए संकट
तृणमूल कांग्रेस ने 1 जून को ऋतब्रत बनर्जी को पार्टी से निष्कासित कर दिया, जिसका बड़ा कारण विधानसभा अध्यक्ष को दी गई जानकारी थी कि उन्होंने पार्टी के उस पत्र पर हस्ताक्षर नहीं किए थे, जिसमें चट्टोपाध्याय को विपक्ष का नेता नामित किया गया था। ममता बनर्जी ने इन घटनाओं को दिल्ली से रची गई साजिश करार दिया है। वहीं, ऋतब्रत बनर्जी का कहना है कि वे ममता बनर्जी के साथ हैं, लेकिन उन्हें अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व से समस्या है।
