पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के लिए चुनाव प्रचार जोरों पर हैं, सभी प्रमुख दल वोटर्स को साधने में जुटे हैं. यह चुनाव उन लोगों के लिए भी बेहद खास है जो भारत के नागरिक हैं लेकिन उन्हें बांग्लादेशी कहकर पड़ोसी देश में पहुंचा दिया गया था. इस बार यह चुनाव इन लोगों के लिए बहुत खास रहेगा कि क्योंकि ये वोटर्स नई सरकार के (not roads electricity) चयन के लिए वोट तो करेंगे ही, साथ में अपनी भारतीय पहचान भी साबित करेंगे.
मुस्लिम बहुल मुर्शिदाबाद जिले के रहने वाले मिनारुल शेख ऐसे ही एक शख्स हैं. जिले के बेलडांगा में अपने मिट्टी की दीवार वाले घर के बाहर खड़े होकर, दस्तावेजों से भरा एक फोल्डर दिखाते हुए 34 साल के मिनारुल कहते हैं कि वह इस बार सिर्फ वोट देने के लिए पोलिंग बूथ तक नहीं जाएंगे, बल्कि जो उनसे “छीन” गया था – उसे वापस लेने के लिए भी जाएंगे.
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यह वोट मेरा जवाब होगा
अपने हाथ में वोटर स्लिप दिखाते हुए मिनारुल ने कहा, “पिछले साल, उन्होंने मुझे यह कहते हुए दूसरे देश में फेंक दिया कि मैं भारतीय नागरिक नहीं हूं. यह वोट मेरा जवाब होगा.” मिनारुल को अपना वोटर स्लिप हासिल करने के लिए इस बार काफी मशक्कत करनी पड़ी. उन्हें 8 महीने, 4 सुनवाई और बार-बार ब्लॉक ऑफिस के चक्कर लगाने के बाद स्लीप वापस मिली है.
not roads electricity – मुर्शिदाबाद के 6 लोग जो रोजगार के लिए महाराष्ट्र गए थे, लेकिन उनके साथ वहां बुरा बर्ताव किया गया. साथ ही अब उन्हें यह डर भी सता रहा है कि अपने घर आने के बाद भी उन्हें यह साबित करना होगा कि वे इसी देश के नागरिक हैं. बेलडांगा और हरिहरपारा के गांवों में, यह डर अब विधानसभा चुनाव अभियान पर मंडरा रहा है. उनके आस-पास के कई लोगों के लिए, यह चुनाव बदलाव, सत्तारूढ़ पार्टी (TMC) के खिलाफ भारी गुस्सा या रोजगार की कमी को लेकर हो सकता है, लेकिन इन 6 परिवारों के लिए यह उनकी पहचान का चुनाव बन गया है.


