कोलकाता : पश्चिम बंगाल सरकार ने सरकारी स्कूलों के बाद अब राज्य के भीतर संचालित होने वाले सभी मदरसों में भी दैनिक प्रार्थना के समय राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ के गायन को पूरी तरह से अनिवार्य घोषित (Vande Mataram mandatory) कर दिया है। सरकार के शिक्षा और अल्पसंख्यक कल्याण विभाग द्वारा आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी कर यह कड़ा आदेश दिया गया है। यह नया नियम सरकार से वित्तीय मदद पाने वाले सरकारी और गैर-सरकारी सभी प्रकार के मान्यता प्राप्त मदरसों के लिए समान रूप से लागू होगा। इस नए सरकारी आदेश के मुताबिक, मदरसों में सुबह की प्रार्थना के समय मौजूद सभी शिक्षकों, कर्मचारियों और छात्र-छात्राओं को ‘वंदे मातरम्’ गाना पड़ेगा।
मदरसों से जुड़े फैसले के अलावा राज्य सरकार का एक और नया प्रशासनिक आदेश आया है, जिसे लेकर राजनैतिक गलियारों में बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। यह आदेश सीधे तौर पर पश्चिम बंगाल के सरकारी कर्मचारियों के अभिव्यक्ति, बोलने और लिखने की संवैधानिक आजादी को सीमित करता है। नए नियमों के मुताबिक, कोई भी सरकारी कर्मचारी अब उच्चाधिकारियों की बिना लिखित इजाजत के मीडिया के सामने बयानबाजी नहीं कर सकता। वे अखबारों, पत्रिकाओं या टीवी न्यूज चैनलों को अपना व्यक्तिगत इंटरव्यू भी नहीं दे सकते।
Vande Mataram mandatory – इस नए फरमान के तहत कोई भी कर्मचारी केंद्र या राज्य सरकार की मौजूदा नीतियों की प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से आलोचना नहीं कर सकेगा। बुद्धिजीवियों और कर्मचारी संघों का कहना है कि सरकार का यह आदेश कर्मचारियों की आवाज दबाने वाले काले नियम जैसा है, जिसमें सरकारी स्कूलों-कॉलेजों के शिक्षक और प्रोफेसर भी शामिल हैं।


