बड़वानी : जिला मुख्यालय से करीब 17 किलोमीटर दूर अंजड़ तहसील के छोटा बड़दा पुनर्वास बसाहट में ग्रामीण गंभीर जल संकट से जूझ रहे हैं. बसाहट के आधे से अधिक हिस्से में पीने के पानी की कोई (water crisis) स्थायी व्यवस्था नहीं है. जिसके चलते करीब 200 से अधिक परिवार एक खुले और बिना मुंडेर वाले कुएं का गंदा पानी पीने को मजबूर हैं.
गंदा पानी पीने को मजबूर लोग
सरकार की महत्वाकांक्षी जल जीवन मिशन योजना के तहत लगाए गए नल केवल कागजों तक ही सीमित रह गए हैं. नलों से पानी नहीं आने के कारण लोगों को कुएं पर निर्भर रहना पड़ रहा है. बसाहट निवासी गेंदा बाई ने बताया कि, ”कुएं के आसपास बड़ी संख्या में परिवार रहते हैं और सभी इसी गंदे पानी का उपयोग पीने के लिए कर रहे हैं. उनके पास कोई दूसरा विकल्प नहीं है.
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कम पड़ जाता है टंकी का पानी
इस मामले में ग्राम पंचायत छोटा बड़दा के सरपंच पप्पू डाबी ने बताया कि, ”बसाहट में पानी की टंकी बनी हुई है. लेकिन एक टंकी से पूरी बसाहट में पानी की आपूर्ति नहीं हो पाती. कुएं की सफाई करवाई गई थी और पानी साफ करने के लिए मोटर लगाने का प्रयास भी किया गया, लेकिन ग्रामीणों ने उसे लगाने नहीं दिया.
10 साल से परेशान हो रहे ग्रामीण
ग्रामीण रहीसा बाई ने बताया कि, ”वे पिछले 10 वर्षों से यहां रह रही हैं, लेकिन आज तक पानी की कोई पुख्ता व्यवस्था नहीं हो सकी. सरपंच और सचिव मौके पर आते हैं, लेकिन निरीक्षण के बाद लौट जाते हैं. जब (water crisis) समाधान की मांग की जाती है तो पंचायत एनवीडी विभाग का हवाला देती है और एनवीडी विभाग पंचायत के पास भेज देता है। इस आपसी टालमटोल में ग्रामीण परेशान हो चुके हैं.”


