नई दिल्ली: भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने मतदाता सूची के पुनरीक्षण और वोटर रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया को अधिक सुगम, पारदर्शी और नागरिक-अनुकूल बना दिया है। अब आम नागरिकों को मतदाता सूची में अपना नाम बनाए रखने अथवा किसी आपत्ति के समाधान के लिए बार-बार निर्वाचन कार्यालयों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। चुनाव आयोग ने स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए हैं कि जिन मतदाताओं को नोटिस प्राप्त हुए हैं, बूथ लेवल अधिकारी (BLOs) सीधे उनके घर (voter registration process) पहुंचकर आवश्यक दस्तावेज एकत्र करेंगे।
voter registration process – तीनों चुनाव आयुक्तों की उच्चस्तरीय बैठक में यह सर्वसम्मत निर्णय लिया गया। इसके साथ ही आवेदन प्रस्तुत करने की अंतिम समय-सीमा (डेडलाइन) को आगे बढ़ा दिया गया है, जिससे विशेष रूप से दिल्ली और महाराष्ट्र के नागरिकों को बड़ी राहत मिली है। इसके अलावा समाज के वंचित, कमजोर और बेघर वर्ग के मताधिकार को सुरक्षित करने के लिए विशेष हेल्प डेस्क स्थापित किए जा रहे हैं।
दफ्तर जाने की बाध्यता खत्म
स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) अभियान के अंतर्गत जिन मतदाताओं को ‘अनमैप्ड’ स्टेटस अथवा डेटा में किसी तार्किक विसंगति (Logical Discrepancies) से संबंधित नोटिस जारी किए गए हैं, उन्हें इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर (ERO) के कार्यालय जाने की आवश्यकता नहीं होगी। नियुक्त BLOs सीधे मतदाता के पते पर जाकर संबंधित अभिलेख एकत्र करेंगे और उन्हें प्रमाणित कर सीधे आयोग के आधिकारिक पोर्टल पर डिजिटल रूप से अपलोड करेंगे।


