अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के तेवर ना सिर्फ नरम पड़ गए हैं, बल्कि अमेरिका सरेंडर मोड में नजर आने लगा है. क्योंकि जहां ईरान एक तरफ लगातार युद्धविराम का उल्लंघन कर रहा है तो वहीं अमेरिका संधि प्रस्ताव लेकर ईरान का दरवाजा खटखटाने में लगा है. सवाल यही है कि क्या ट्रंप ने ईरान के जिद के आगे (US Iran relations) सरेंडर कर दिया या फिर ये कोई साजिश तो नहीं, क्योंकि अगर अतीत में झांके तो ट्रंप का चरित्र यू टर्न वाला रहा है.
US Iran relations – फारस की खाड़ी में 40 दिनों तक चले युद्ध के बाद अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर का ऐलान तो हो गया है लेकिन इस जंग ने ईरान को एक ऐसी नई शक्ति के रूप में उभारा है, जिसने सुपरपावर अमेरिका की साख पर सवालिया निशान लगा दिए हैं. भले ही ईरानी नेतृत्व पर अमेरिका ने चोट की हो, लेकिन न तो सत्ता परिवर्तन हुआ, न परमाणु मिशन रुका और न ही बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम खत्म हुआ. उल्टा, इस जंग ने ईरान को होर्मुज स्ट्रेट पर नियंत्रण का अवसर दे दिया है.
ट्रंप ने फिर लिया यू-टर्न
ईरान ने युद्धविराम तोड़ते हुए होर्मुज स्ट्रेट से लेकर UAE तक बमबारी की है. जहां दुनिया युद्ध के अगले चरण का अनुमान लगा रही थी, वहीं ‘मिस्टर यू-टर्न’ के नाम से मशहूर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर अपनी नीति बदल ली. अमेरिका ने ऐलान किया कि उसका ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ पूरा हो चुका है और वह जंग को आगे नहीं बढ़ाना चाहता है.
अमेरिका सरेंडर मोड में?
रूबियो के इस बयान के बाद दो बड़े सवाल उठने लगे हैं. क्या अमेरिका ने ईरान के सामने सरेंडर कर दिया है? क्या ईरान की युद्धनीति ने ट्रंप को परास्त कर दिया है? अमेरिका ने होर्मुज में ‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’ पर रोक लगा दी है. ट्रंप का दावा है कि ईरान से समझौते पर बातचीत सही दिशा में है, हालांकि नाकाबंदी जारी रहेगी. यही वह परियोजना थी जिसके तहत अमेरिका अपनी सैन्य ताकत दिखाने की कोशिश कर रहा था, लेकिन महज 48 घंटे में ही उसे ठंडे बस्ते में डालना पड़ा.
