वाशिंगटन : विश्व प्रसिद्ध सोशल मीडिया दिग्गज कंपनी ‘मेटा’ (Meta) के लिए वैश्विक स्तर पर संकट का दौर समाप्त होने का नाम नहीं ले रहा है। एक ओर जहाँ भारत में एल्गोरिद्म (Algorithm) और भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी (IT) कानूनों के अनुपालन को लेकर मेटा के शीर्ष अधिकारियों से कड़ाई से पूछताछ की जा रही है, वहीं दूसरी ओर (whip on meta) अमरीका के न्यू मैक्सिको स्टेट कोर्ट ने कंपनी को एक ऐतिहासिक झटका दिया है।
whip on meta – कोर्ट ने मेटा कंपनी को टीनएजर्स (नाबालिगों) की मेंटल हेल्थ (मानसिक स्वास्थ्य) के लिए गठित विशेष फंड में 567 मिलियन डॉलर (लगभग 54 अरब भारतीय रुपये) जमा कराने तथा युवा यूजर्स हेतु अपने प्लेटफॉर्म्स के कार्यप्रणाली में क्रांतिकारी बदलाव करने का कड़ा आदेश दिया है। अदालत का स्पष्ट मत है कि बच्चों को मानसिक नुकसान पहुँचाने और उन्हें सुरक्षित वातावरण न देने के लिए कंपनी प्रत्यक्ष रूप से उत्तरदायी है।
जूरी ने गहन पड़ताल में पाया था कि कंपनी ने कम उम्र के यूजर्स के लिए फेसबुक और इंस्टाग्राम की सुरक्षा व्यवस्था के संदर्भ में भ्रामक व गलत जानकारियां प्रदान करके ‘कंज्यूमर प्रोटेक्शन लॉ’ का खुला उल्लंघन किया है। सोशल मीडिया कंपनियों द्वारा युवा यूजर्स को पहुँचाए जा रहे मानसिक व सामाजिक नुकसान से जुड़े मामलों में इस ऐतिहासिक फैसले पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हुई थीं।
मेटा को लागू करने होंगे ये बदलाव
संपूर्ण अमरीका में 40 से अधिक राज्यों और 1,300 से अधिक स्कूल डिस्ट्रिक्ट्स ने सोशल मीडिया कंपनियों के विरुद्ध ‘पब्लिक न्यूसेंस’ से संबंधित कड़े केस दर्ज करा रखे हैं।
जज बीडशाइड ने मेटा को निम्नलिखित युवा-सुरक्षा उपाय तत्काल प्रभाव से लागू करने का न्यायिक आदेश सुनाया है:
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मंथली कंट्रोल: टीनएजर्स द्वारा फेसबुक और इंस्टाग्राम के उपयोग पर अभिभावकों का मासिक नियंत्रण।
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नोटिफिकेशन पर रोक: देर रात भेजे जाने वाले पुश नोटिफिकेशन्स पर कड़ा अंकुश।
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वयस्कों के संपर्क पर पाबंदी: नाबालिगों के साथ अज्ञात वयस्कों के सीधे मैसेजिंग संपर्क पर कड़ा तकनीकी नियंत्रण।
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AI चैटबॉट्स सुरक्षा: एआई चैटबॉट्स (AI Chatbots) हेतु विशेष सेफ्टी लेयर्स।
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