लखनऊ : उत्तर प्रदेश में ग्रामीण स्थानीय शासन को लेकर एक बहुत बड़ा और ऐतिहासिक फैसला सामने आया है। प्रदेश में ग्राम प्रधानों का निर्धारित कार्यकाल आज यानी 25 मई को आधिकारिक (UP Panchayat Chunav) रूप से समाप्त हो गया है,लेकिन इसके बावजूद ग्रामीण क्षेत्रों और पंचायती राज व्यवस्था में उनकी मुख्य भूमिका पहले की तरह ही मजबूत बनी रहेगी।

इसे भी पढ़ें – कानपुर में ITBP जवान की मां का हाथ काटने का मामला; जांच में दोनों अस्पताल दोषी, FIR के आदेश

UP Panchayat Chunav – दरअसल, उत्तर प्रदेश पंचायती राज विभाग द्वारा भेजे गए एक विशेष नीतिगत प्रस्ताव को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपनी अंतिम मंजूरी दे दी है। इस नए प्रस्ताव के तहत, कार्यकाल खत्म होने के बाद भी मौजूदा ग्राम प्रधानों को ही उनके संबंधित गांवों में ‘प्रशासक’  के रूप में नया काम सौंपा जाएगा।  

 प्रधानों के पास ही रहेंगे वित्तीय अधिकार

उत्तर प्रदेश के प्रशासनिक इतिहास में यह पहला मौका होगा, जब नियमित कार्यकाल समाप्त होने के बाद ग्राम पंचायतों में एक विशेष ‘प्रशासक समिति’ का गठन किया जा रहा है। अब तक की स्थापित व्यवस्था के अनुसार, जब भी ऐसी परिस्थितियां बनती थीं, तब गांवों के एडीओ पंचायत या ग्राम विकास सचिव (VDO) को सरकार द्वारा गांवों का सरकारी प्रशासक नियुक्त किया जाता था।  

Share.
Exit mobile version