गुजरात के ऊना के मोटा समढियाला गांव में साल 2016 में कथित गोकशी के आरोप में गांव के कुछ परिवारों पर हमला किया गया था. उस समय इस मामले में 42 लोगों को आरोपी बनाया गया था. पूरे मामले (Una Dalit Case Verdict) में आज 10 साल बाद अब कोर्ट ने 37 आरोपियों को बरी कर दिया है. इसके साथ ही पूरे मामले में 5 आरोपियों को दोषी ठहराया गया था, जिनको कोर्ट ने 5-5 साल की सजा का ऐलान किया है.
Una Dalit Case Verdict – कोर्ट ने इस मामले में आरोपी कुछ पुलिसकर्मियों को भी बरी कर दिया है. इनमें कंचनबेन, PSI पांडे, ऊना PSO करशनभाई और निर्मल झाला शामिल है. इनमें से निर्मल झाला की पहले ही मौत हो चुकी है. कुल 42 आरोपियों में से अब तक दो आरोपियों की मौत भी हो चुकी है.
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ऊना कांड सिर्फ एक स्थानीय घटना नहीं थी, बल्कि इसने भारत में जाति, सामाजिक न्याय और कानून के राज पर गहरी बहस को जन्म दिया था. घटना ने दलित उत्पीड़न के मुद्दे को राष्ट्रीय बहस बना दिया था. आज भी इस मामले को लेकर लोग सरकार-प्रशासन से सवाल पूछते रहते हैं. 10 साल बाद आ रहे कोर्ट के फैसले पर हर किसी की नजर है.
क्या है पूरा मामला?
गुजरात के ऊना में लगभग 10 साल पहले कुछ दलित युवकों को अधनंगा कर सरेआम पीटा गया था. यह पूरा मामला ऊना तालुका के मोटा समधियाला गांव का है, मारपीट की घटना 11 जुलाई 2016 हुई थी. यहां एक दलित परिवार के चार युवकों केा बीफ रखने के आरोप में सरेआम लाठियों और बेल्टों से पीटा गया था. पीटने वाले तथाकथित ‘गौरक्षक’ थे. गौरक्षकों ने उन पर गाय को मारने का आरोप लगाया था.
