उज्जैन। महाकाल की नगरी उज्जैन में गुरुवार को ‘सेवाज्ञ संस्थानम्’ की तीन दिवसीय युवा धर्म संसद का विचारोत्तेजक आगाज हुआ।प्रारंभिक सत्र ‘युवा पंचायत’ में मतांतरण और सांस्कृतिक पहचान से जुड़े विषयों पर देश के प्रबुद्ध वक्ताओं ने अपने विचार रखे। इस दौरान समाज की जड़ों को मजबूत करने और (Ujjain Yuva Dharm Sansad) भ्रामक नैरेटिव से बचने पर जोर दिया गया।
IRS अधिकारी निशा उरांव ने मतांतरण के दंश पर साधा निशाना
रांची (झारखंड) में पदस्थ भारतीय राजस्व सेवा (IRS) की वरिष्ठ अधिकारी निशा उरांव ने मतांतरण के प्रभाव को एक सटीक रूपक के जरिए समझाया। उन्होंने कहा कि अपनी मूल मिट्टी से उखाड़कर गमले में लगाया गया पौधा जिंदा तो रहता है और उसमें फूल भी आते हैं, लेकिन उसकी गहरी जड़ों का स्थायित्व और विशाल छाया देने की क्षमता खत्म हो जाती है। जब कोई समाज अपनी मूल परंपरा और सांस्कृतिक चेतना से कटता है, तो समाज में एक शून्यता पैदा होती है, जिसका फायदा उठाकर भ्रामक नैरेटिव प्रवेश करते हैं।
100 वर्ष पूरे होने के बाद संघ की जिम्मेदारी और बढ़ी
इससे पहले राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत गुरुवार को इंदौर होते हुए उज्जैन पहुंचे। वे शुक्रवार को युवा धर्म संसद का विधिवत उद्घाटन करेंगे। अपने प्रवास के पहले दिन उन्होंने स्वयंसेवकों को संबोधित करते हुए कहा, “पहले संघ को लेकर कुछ लोगों की अलग विचारधारा थी और हम पर प्रतिबंध भी लगे, लेकिन आज हमारी स्वीकार्यता व्यापक है। संघ के 100 वर्ष पूरे होने के बाद अब समाज निर्माण में हमारी भूमिका और अधिक बढ़ गई है।” उन्होंने (Ujjain Yuva Dharm Sansad) पर्यावरण संरक्षण, जल संरक्षण, सामाजिक समरसता और नागरिक अनुशासन पर जोर दिया।


