नई दिल्ली: तृणमूल कांग्रेस (TMC) की संसदीय पार्टी के भीतर मचे विवाद के बीच, पार्टी के महासचिव और संसदीय दल के नेता अभिषेक बनर्जी ने अपना पक्ष मजबूती से रखा है। रविवार को टीएमसी सांसद कार्ति झा आजाद और सागरिका घोष ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात कर अभिषेक बनर्जी का पत्र सौंपा। इस पत्र में स्पष्ट किया गया है कि टीएमसी एक एकीकृत और अविभाज्य दल है, और भीतर किसी भी प्रकार के ‘समांतर गुट’ का कोई संवैधानिक आधार नहीं है।

📜 सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला

पत्र में ‘सुभाष देसाई बनाम महाराष्ट्र सरकार’ मामले (2023) के ऐतिहासिक निर्णय का जिक्र करते हुए कहा गया है कि 91वें संविधान संशोधन के बाद ‘पार्टी के भीतर विभाजन’ (Split) का बचाव समाप्त हो चुका है। पार्टी नेतृत्व ने स्पष्ट किया कि:

  • राजनीतिक दल सर्वोच्च है, विधायी दल नहीं।

  • व्हिप की नियुक्ति का अधिकार केवल मूल राजनीतिक दल के पास है।

  • अलग गुट बनाकर स्वतंत्र मान्यता का दावा करना कानूनन अवैध है।

🚫 विलय ही एकमात्र संवैधानिक रास्ता

अभिषेक बनर्जी के पत्र में इस बात पर जोर दिया गया है कि दसवीं अनुसूची के तहत केवल ‘विलय’ (Merger) ही एकमात्र वैध रास्ता है। इसके लिए दो शर्तें अनिवार्य हैं: पहली, राजनीतिक दल स्वयं किसी अन्य दल में विलय करे, और दूसरी, विधायी दल के कम-से-कम दो-तिहाई सदस्य उस विलय का समर्थन करें। केवल दो-तिहाई सदस्यों का अलग हो जाना ही उन्हें स्वतंत्र इकाई का दर्जा नहीं दिला सकता।

⚠️ पार्टी व्हिप के उल्लंघन पर अयोग्यता की चेतावनी

पार्टी नेतृत्व ने स्पीकर को आगाह किया है कि यदि कोई सदस्य या समूह पार्टी व्हिप का उल्लंघन करता है या नेतृत्व को चुनौती देता है, तो वह दसवीं अनुसूची के तहत ‘अयोग्यता’ (Disqualification) का पात्र है। टीएमसी ने अनुरोध किया है कि बागी गुट को मान्यता देने जैसा कोई भी निर्णय लेने से पहले पार्टी को अपना पक्ष रखने का अवसर जरूर दिया जाए।

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