छिन्दवाड़ा : कम पानी और पथरीली जमीन में भी ऐसी फसलें ऊगाई जा सकती हैं, जो किसानों को मालामाल कर सकती हैं. संतरे, मोसंबी और नींबू की फसल भी लगाकर किसान मालामाल हो सकता है. इसके (rocky land will yield yellow gold) लिए देना हरि के कृषि विज्ञान केंद्र में आदिवासी किसानों को ट्रेनिंग देकर उन्हें पौधे दिए गए और बताया गया कि कैसे पथरीली जमीन को भी हरा भरा करके उससे बंपर कमाई की जा सकती है.
केंद्रीय नींबू वर्गीय फल अनुसंधान संस्थान ने जिले के कृषि विज्ञान केंद्र के माध्यम से एससी-एसटी किसानों के लिए एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया, जिसमें जिले के 200 अनुसूचित जाति व 50 अनुसूचित जनजाति किसानों को जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय के संचालक विस्तार सेवाएं डॉ.टीआर शर्मा ने नींबू वर्गीय फलों की मानव जीवन में उपयोगिता एवं उनके स्वास्थ्य संबंधी महत्व के बारे में जानकारी दी. उन्होंने बताया कि तामिया, जुन्नारदेव, परासिया, अमरवाड़ा एवं हर्रई क्षेत्रों में नींबू वर्गीय फलों के उत्पादन की अच्छी संभावनाएं हैं.
उन्होंने यह भी बताया कि इन पौधों को खेतों में लगाकर किसान अपनी आर्थिक स्थिति में सुधार कर सकते हैं। नींबू वर्गीय फलों की खेती इस क्षेत्र के लिए अत्यंत अनुकूल है और इससे किसान अच्छी आमदनी प्राप्त कर सकते हैं. उन्होंने कहा, ” छिंदवाड़ा का संतरा पूरे देश में सर्वश्रेष्ठ माना जाता है और नींबू, मौसंबी और संतरे की खेती इन क्षेत्रों में आसानी से की जा सकती है.”
rocky land will yield yellow gold – नागपुर से आए वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. डी.टी. मेश्राम ने बताया, ” गर्मी में फल लेने के लिए जुलाई-अगस्त में आने वाले फूलों को रखना चाहिए और दूसरे समय के फूलों को हटा देना चाहिए. गर्मी में फल आने पर नींबू के एक पौधे से पांच साल बाद 2000 से 5000 रु तक की कमाई की जा सकती है. यदि एक एकड़ में 100 पौधे लगाए जाएं तो प्रति एकड़ 2 लाख से 5 लाख रु तक की आमदनी संभव है.’
