भोपाल: राजधानी समेत पूरे प्रदेश में नापतौल विभाग की नई कम्प्यूटराइज्ड केंद्रीकृत निरीक्षण व्यवस्था (सीसीआईएस) लागू होने के साथ ही इस पर सवाल खड़े होने लगे हैं. नई व्यवस्था के तहत पेट्रोल पंप, गैस एजेंसी और तौल कांटे जैसे संस्थानों की जांच से दो दिन पहले ही उन्हें सूचना दी जाएगी. ऐसे में उपभोक्ता संगठनों और विशेषज्ञों का कहना है कि अब निरीक्षण से पहले ही संस्थान सतर्क हो जाएंगे, तो नापतौल में होने वाली गड़बड़ी और चोरी कैसे पकड़ी जाएगी.
औचक निरीक्षण की जगह तय प्रक्रिया
नापतौल विभाग के अधिकारियों ने बताया कि नई व्यवस्था के तहत अब राजधानी समेत प्रदेशभर में पेट्रोल पंप, गैस एजेंसी, तौल कांटे और कई औद्योगिक संस्थानों की जांच पहले से तय प्रक्रिया के तहत होगी. विभागीय टीम मौके पर पहुंचने से दो दिन पहले संबंधित संस्थान को सिस्टम जनरेटेड एसएमएस के माध्यम से सूचना दी जाएगी. इसके बाद ही निरीक्षण किया जाएगा. इससे पहले विभाग की टीमें औचक निरीक्षण कर गड़बड़ियां पकड़ती थीं, लेकिन अब यह व्यवस्था लगभग खत्म होती दिख रही है.
जांच की अवधि भी बढ़ाई गई
पहले इन संस्थानों की नियमित जांच 1 साल के अंतराल में होती थी. अब नई व्यवस्था में इसे बढ़ाकर 2 साल कर दिया गया है. यानी एक बार निरीक्षण होने के बाद अगली जांच के लिए संस्थान को 2 साल तक का समय मिल सकता है. इस बदलाव को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं कि इससे निगरानी और ढीली पड़ सकती है.
शिकायत भी पोर्टल से, सूचना भी संस्थान को
सीसीआईएस व्यवस्था के तहत किसी संस्थान के खिलाफ शिकायत पहले पोर्टल पर दर्ज की जाएगी. इसमें निरीक्षक के साथ संस्थान के संचालक का नाम, पता और मोबाइल नंबर भी दर्ज रहेगा. निरीक्षण की तारीख तय होने के बाद सिस्टम के माध्यम से संबंधित संस्थान को दो दिन पहले सूचना भेजी जाएगी. यही प्रावधान विवाद की वजह बना हुआ है, क्योंकि सूचना मिलने के बाद संस्थान संभावित गड़बड़ी को अस्थायी रूप से ठीक कर सकते हैं.
निरीक्षकों की भूमिका भी बदली
नई व्यवस्था में निरीक्षकों को पूल सिस्टम में शामिल किया गया है, जिसमें अलग-अलग जिलों के निरीक्षक होंगे. उप नियंत्रक या सहायक नियंत्रक पोर्टल पर निरीक्षण के लिए संस्थान का चयन करेंगे. इसके बाद सिस्टम रेंडम तरीके से निरीक्षक तय करेगा. निरीक्षक को एसएमएस के जरिए सूचना मिलेगी और सहमति देने के बाद ही निरीक्षण की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी.
महीने में तय निरीक्षण का लक्ष्य
नई व्यवस्था के अनुसार प्रत्येक जिले में हर महीने कम से कम 10 संस्थानों का निरीक्षण कराया जाएगा. वहीं प्रत्येक निरीक्षक को हर महीने कम से कम 50 संस्थानों की जांच करनी होगी, जिनमें 25 स्थाई संस्थान शामिल रहेंगे. निरीक्षण के 48 घंटे के भीतर रिपोर्ट पोर्टल पर अपलोड करना अनिवार्य होगा. विभागीय स्तर पर हर महीने समीक्षा की जाएगी, जबकि प्रमुख सचिव 3 महीने में वीसी के जरिए इसकी समीक्षा करेंगे.
अधिकारियों और कर्मचारियों के अलग-अलग तर्क
मध्य प्रदेश नापतौल कर्मचारी संघर्ष समिति के अध्यक्ष उमाशंकर तिवारी का कहना है कि “सीसीआईएस के नाम नापतौल विभाग की टीम के हाथ बंध गए हैं. जबकि उपभोक्ताओं के हितों का संरक्षण करने के लिए नापतौल विभाग की स्थापना की गई है. ऐसे में पेट्रोल-डीजल पंप, गैस एजेंसियां, धर्म-कांटा और उद्योग को सीसीआईएस से बाहर रखना चाहिए.”
वहीं इस मामले में नापतौल विभाग के नियंत्रक ब्रजेश सक्सेना का कहना है कि “पेट्रोल पंप का निरीक्षण अब एक साल की बजाय 2 साल के अंतराल में होगा. नई व्यवस्था से औचक निरीक्षण के दौरान पारदर्शिता और डिजिटल निगरानी बढ़ेगी.”
