सरगुजा: जिला पंचायत दफ्तर में सोमवार को ‘सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट’ पर एक दिवसीय कार्यशाला और ‘स्वच्छता संवाद’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन करते हुए इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य ग्राम, जनपद और जिला पंचायत स्तर पर कचरा प्रबंधन के नियमों को वैज्ञानिक तरीके से लागू करना था। इस अवसर पर जन प्रतिनिधियों, अधिकारियों और कर्मचारियों ने स्वच्छता को एक सतत जिम्मेदारी मानते हुए इसे आजीविका से जोड़ने का संकल्प लिया।
💡 कचरा प्रबंधन: केवल सफाई नहीं, बल्कि आय का जरिया
कार्यशाला में कचरे के पृथक्करण (Source Separation), ठोस एवं प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन, यूजर चार्ज व्यवस्था और बल्क वेस्ट जनरेटर (BWG) पर नियंत्रण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। जिला पंचायत सीईओ विनय कुमार अग्रवाल ने कहा कि वैज्ञानिक तरीके से कचरे का पुनर्चक्रण और प्रबंधन करके पंचायतें न केवल अपने क्षेत्र को स्वच्छ रख सकती हैं, बल्कि कचरे से आर्थिक लाभ भी अर्जित कर सकती हैं।
📋 जन प्रतिनिधियों की बढ़ेगी भूमिका: 16वें वित्त की तकनीकी जानकारी
सीईओ विनय कुमार अग्रवाल ने बताया कि इस कार्यशाला के माध्यम से जन प्रतिनिधियों को 16वें वित्त आयोग की नई तकनीकी जानकारियों से भी अवगत कराया गया है। इसका उद्देश्य ग्राम पंचायतों को और अधिक सक्षम बनाना है ताकि वे गांव के विकास कार्यों को बेहतर ढंग से क्रियान्वित कर सकें। कार्यक्रम के अंत में जिला पंचायत अध्यक्ष ने सभी प्रतिभागियों को स्वच्छता की शपथ दिलाई और एक स्वच्छ एवं स्वस्थ ग्राम निर्माण के लिए सामूहिक प्रयास करने का आह्वान किया। अब सभी प्रतिभागियों से उम्मीद है कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में स्वच्छता गतिविधियों को प्रभावी ढंग से लागू कर ठोस एवं प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन को आजीविका का हिस्सा बनाएंगे।


