नई दिल्ली: नीट (NEET) पेपर लीक विवाद के बाद देश में राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं की विश्वसनीयता और व्यवस्थाओं पर लगातार सवाल खड़े हो रहे हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने इस पर गहरी चिंता जताते हुए स्पष्ट किया है कि राष्ट्रीय स्तर की प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं को पारदर्शी और त्रुटिहीन बनाने के लिए नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) को ‘इंस्टीट्यूशनलाइज’ यानी एक सुदृढ़ और स्थायी संस्था के रूप में विकसित करना अनिवार्य है। जस्टिस पी. एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि सिर्फ परीक्षा केंद्रों पर निगरानी बढ़ाने या प्रश्नपत्रों को सीलबंद रखने से काम नहीं चलेगा, बल्कि एक ऐसा समग्र ढांचा तैयार करना होगा जिस पर पूरे देश के छात्र और अभिभावक भरोसा कर सकें।

🏛️ NTA को ‘संस्थागत’ (Institutionalize) बनाने की क्यों है जरूरत?

अदालत ने रेखांकित किया कि संस्थागत ढांचे के अभाव में अनुभवी अधिकारियों के ट्रांसफर होते ही परीक्षा संचालन का संचित अनुभव खत्म हो जाता है:

  • स्थायी व प्रशिक्षित मैनपावर: एजेंसी के पास अपनी स्थायी विशेषज्ञ टीम और प्रशिक्षित कार्यबल होना चाहिए।

  • विशेषज्ञ सुरक्षा इकाइयां: प्रश्नपत्र निर्माण, सीलिंग और वितरण की सुरक्षा के लिए अलग समर्पित विंग बनाई जाए।

  • मजबूत साइबर सुरक्षा व R&D: आधुनिक टेक्नोलॉजी, सॉवरेन डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और साइबर सुरक्षा पर लगातार शोध व विकास (R&D) जारी रहे।

  • संस्थागत ज्ञान का संरक्षण: नेतृत्व बदलने पर भी परीक्षा सुरक्षा और संचालन की कार्यप्रणाली प्रभावित न हो।

🔒 मौजूदा समय में कैसे काम करता है NTA का परीक्षा सिस्टम?

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने केंद्र सरकार की ओर से NTA की वर्तमान कार्यप्रणाली का विवरण अदालत के समक्ष रखा:

  • क्वेश्चन बैंक निर्माण: विभिन्न विषय विशेषज्ञों के माध्यम से एक विशाल गोपनीय क्वेश्चन बैंक तैयार किया जाता है।

  • मल्टीपल सेट्स: प्रश्नों के चयन के बाद कई वैकल्पिक प्रश्नपत्र तैयार किए जाते हैं, जिनमें से अंतिम सेट का चुनाव अत्यंत सीमित स्तर पर होता है।

  • सुरक्षित प्रिंटिंग व ट्रैकिंग: प्रिंटिंग प्रेस में CCTV और विशेष सुरक्षा बलों की तैनाती रहती है, जबकि प्रश्नपत्रों को सुरक्षित बॉक्स में रखकर GPS ट्रैकिंग के जरिए बैंकों के स्ट्रॉन्ग रूम तक पहुंचाया जाता है।

🤖 AI और ब्लॉकचेन तकनीक: परीक्षा सुधारों में कैसे मददगार?

परीक्षा प्रणाली में आधुनिक तकनीक के समावेश को लेकर नंदन नीलेकणी समिति के सुझावों पर भी चर्चा हुई:

  • ब्लॉकचेन ट्रैकिंग: ब्लॉकचेन तकनीक के जरिए यह स्पष्ट डिजिटल रिकॉर्ड रहेगा कि किसी गोपनीय प्रश्नपत्र या डिजिटल दस्तावेज को कब, कहां और किसने एक्सेस किया।

  • आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI): AI टूल्स की मदद से परीक्षा केंद्रों पर होने वाली किसी भी असामान्य गतिविधि, नकल के पैटर्न या संभावित सिस्टम गड़बड़ियों की तुरंत पहचान की जा सकेगी।

📑 राधाकृष्णन समिति और नंदन नीलेकणी समिति के प्रमुख सुझाव

राष्ट्रीय स्तर की प्रवेश परीक्षाओं की समीक्षा के लिए गठित उच्च स्तरीय समितियों ने व्यवस्थागत बदलावों की सिफारिश की है:

  • राधाकृष्णन समिति के सुझाव: NTA का दायरा सीमित कर उसे स्थायी स्वरूप देना, कंप्यूटर आधारित परीक्षा (CBT) को बढ़ावा, ‘डिजी एग्जाम’ के जरिए बायोमेट्रिक सत्यापन और परीक्षा केंद्रों पर चुनाव जैसी त्रिस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था।

  • नंदन नीलेकणी समिति के सुझाव: डिजिटल लॉकिंग सिस्टम, स्वदेशी मजबूत डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, ब्लॉकचेन सुरक्षा लेयर और एंड-टू-एंड साइबर सिक्योरिटी ऑडिट।

📋 याचिकाकर्ताओं की मांग: स्वतंत्र परीक्षा प्राधिकरण और CBT मॉडल

सुप्रीम कोर्ट में दायर विभिन्न याचिकाओं के माध्यम से परीक्षा सुधारों को लेकर कई मांगें रखी गई हैं:

  • पुनर्गठन व स्वतंत्र प्राधिकरण: ‘फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन’ (FAIMA) सहित अन्य याचिकाकर्ताओं ने NTA के व्यापक पुनर्गठन या संसद द्वारा पारित कानून के तहत एक वैधानिक व स्वतंत्र राष्ट्रीय परीक्षा प्राधिकरण बनाने की मांग की है।

  • पारदर्शिता की मांग: याचिकाओं में नीट को पूरी तरह कंप्यूटर आधारित (CBT) मॉडल में बदलने, डिजिटल लॉकिंग लागू करने और केंद्रवार परीक्षा परिणाम सार्वजनिक करने की वकालत की गई है।

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