हिंदू धर्म में महाशिवरात्रि का पर्व शिव भक्ति का सबसे बड़ा उत्सव माना जाता है. साल 2026 में महाशिवरात्रि का व्रत 15 फरवरी को रखा जाएगा. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, इस साल की महाशिवरात्रि बेहद खास होने वाली है क्योंकि इस दिन दो ऐसे दुर्लभ संयोग बन रहे हैं, जो भक्तों की हर मनोकामना पूरी करने की शक्ति रखते हैं. आइए जानते (Mahashivratri 2026) हैं इन शुभ संयोगों के बारे में और क्या है पूजा का सही मुहूर्त.
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सर्वार्थ सिद्धि योग
पंचांग के अनुसार, 15 फरवरी को सुबह 07:00 बजे से शाम 07:48 बजे तक (12 घंटे से अधिक) सर्वार्थ सिद्धि योग रहेगा. मान्यता है कि इस योग में की गई पूजा, दान या नया कार्य व्यक्ति को हर क्षेत्र में सफलता दिलाता है. अगर आपके काम लंबे समय से अटके हैं, तो इस समय में रुद्राभिषेक करना बहुत ही लाभकारी होगा.
श्रवण नक्षत्र और शिववास
शाम 07:48 बजे के बाद श्रवण नक्षत्र शुरू होगा. शास्त्रों में श्रवण नक्षत्र को (Mahashivratri 2026) शिव साधना के लिए सर्वश्रेष्ठ माना गया है. साथ ही इस दिन शिववास का संयोग भी है, जो रुद्राभिषेक के फल को कई गुना बढ़ा देता है.

