नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक की बिजली वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) के समूह को बड़ा झटका देते हुए उनकी उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें उन्होंने अडानी पावर द्वारा सरकारी पोर्टल पर (shock to Karnataka Discom) अपलोड किए गए 1,005 करोड़ रुपये के चालान (Invoice) पर अंतरिम रोक लगाने की मांग की थी।
shock to Karnataka Discom – यह चालान बिजली खरीद लेनदेन और बकाया भुगतान की निगरानी करने वाले आधिकारिक पोर्टल पर अपलोड किया गया था। न्यायमूर्ति पी.एस. नरसिम्हा की अध्यक्षता वाली पीठ ने विद्युत अपीलीय न्यायाधिकरण (APTEL) के आदेश में हस्तक्षेप करने से साफ इनकार कर दिया। इसके साथ ही शीर्ष अदालत ने केंद्रीय विद्युत नियामक आयोग (CERC) के उस निर्देश को बरकरार रखा, जिसमें डिस्कॉम को अडानी पावर द्वारा दावा की गई पूरी राशि का भुगतान 45 दिनों के भीतर करने को कहा गया था।
⚡ क्या है पूरा विवाद? लेट पेमेंट सरचार्ज और किश्तों पर टकराव
इस कानूनी विवाद की शुरुआत वर्ष 2023 में हुई थी, जब केंद्रीय विद्युत नियामक आयोग (CERC) ने कर्नाटक डिस्कॉम को अंतर राशि पर वहन लागत (Carrying Cost) और लेट पेमेंट सरचार्ज (LPS) के साथ भुगतान करने के लिए उत्तरदायी ठहराया था:
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छह किश्तों में भुगतान: नियामक ने आदेश दिया था कि यह बकाया भुगतान छह समान किश्तों में किया जाना चाहिए और ऐसा न करने की स्थिति में बिजली उत्पादक कंपनी (अडानी पावर) अतिरिक्त एलपीएस की हकदार होगी।
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अडानी पावर की अपील: आदेश का पालन न होने पर अडानी पावर ने नियमों के गैर-अनुपालन (Non-compliance) का आरोप लगाते हुए आयोग का दरवाजा खटखटाया।
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डिस्कॉम का पक्ष: कर्नाटक पावर कंपनी के नेतृत्व में डिस्कॉम्स ने दावा किया कि उनकी तरफ से कोई वैध बकाया शेष नहीं था और अपीलीय न्यायाधिकरण ने बिना गुण-दोष के विचार किए सीईआरसी के आदेश पर रोक लगाने से गलत तरीके से इनकार किया।
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