विदेशी निवेशकों यानी फॉरेन इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (FIIs) ने भारतीय आईटी बाजार से अपना भरोसा कम करना शुरू कर दिया है. फरवरी के शुरुआती 15 दिनों के भीतर ही इन बड़े निवेशकों ने (Share Market Crash) आईटी शेयरों में भारी बिकवाली की है. बाजार के जानकारों का मानना है कि इसके पीछे सबसे बड़ा डर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की बढ़ती ताकत है, जो अब सीधे तौर पर इंसानी कोडिंग और आईटी सपोर्ट की नौकरियों को चुनौती दे रही है.
Share Market Crash – NSDL की ताज़ा रिपोर्ट के मुताबिक, फरवरी के पहले पखवाड़े में ही FIIs ने 10,956 करोड़ रुपये के आईटी शेयर बेच डाले हैं. इस ताबड़तोड़ बिक्री का नतीजा यह हुआ है कि आईटी कंपनियों में विदेशी निवेशकों की कुल हिस्सेदारी घटकर 4.49 लाख करोड़ रुपये रह गई है.
यह आंकड़ा इसलिए भी डराने वाला है क्योंकि यह पिछले चार सालों का सबसे निचला स्तर है. अगर हम सिर्फ एक महीने पीछे यानी जनवरी 2026 के अंत की बात करें, तो उस समय यह निवेश 5.34 लाख करोड़ रुपये था. यानी महज 15-20 दिनों में इसमें करीब 16 फीसदी की भारी गिरावट दर्ज की गई है. 2025 की शुरुआत में जो होल्डिंग 7.3 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर थी, वह अब ताश के पत्तों की तरह बिखरती दिख रही है.
इस बिकवाली के पीछे की असली वजह ‘जेनरेटिव एआई’ का खौफ बताया जा रहा है. निवेशकों को लग रहा है कि जिस तरह एआई कोडिंग और सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट में महारत हासिल कर रहा है, उससे आने वाले वक्त में भारत की दिग्गज आईटी कंपनियों की जरूरत कम हो सकती है. भारत की आईटी कंपनियों की कमाई का बड़ा हिस्सा मैनपावर यानी इंसानों द्वारा की जाने वाली कोडिंग और सपोर्ट सर्विस से आता है. यही कारण है कि इंफोसिस, टीसीएस और विप्रो जैसी कंपनियों के शेयरों की जोरदार पिटाई हुई है.


