शरद पूर्णिमा हिंदू धर्म के प्रमुख त्योहारों में से एक है. इस दिन चंद्रमा की पूजा करने और रात में खीर बनाकर चांदनी में रखने की परंपरा है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा अपनी 16 कलाओं से परिपूर्ण होता है. इसी विश्वास के चलते लोग दूध और चावल से बनी खीर को चांदनी में रखते हैं और अगले दिन प्रसाद के रूप में (Sharad Purnima 2026) ग्रहण करते हैं. साल 2026 में शरद पूर्णिमा 25 अक्टूबर को मनाई जाएगी. इस पर्व का संबंध भगवान श्रीकृष्ण की महारास लीला से भी जोड़ा जाता है.
शरद पूर्णिमा पर खीर चांदनी में क्यों रखी जाती है?
धार्मिक मान्यता है कि शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा अपनी 16 कलाओं से पूर्ण होता है और उसकी किरणें अमृत के समान मानी जाती हैं. इसी मान्यता के कारण लोग दूध और चावल से बनी खीर को चांदनी में रखते हैं. माना जाता है कि रात भर चंद्रमा की रोशनी में रहने से खीर में विशेष गुण आ जाते हैं और इसे खाने से शरीर को स्वास्थ्य लाभ मिलता है.
भगवान श्रीकृष्ण की 16 कलाओं और महारास लीला से संबंध
हिंदू धार्मिक मान्यताओं में भगवान श्रीकृष्ण को 16 कलाओं से परिपूर्ण अवतार माना जाता है. इसी तरह शरद पूर्णिमा के चंद्रमा को भी सभी 16 कलाओं से युक्त मानने की परंपरा है. इस कारण इस रात को धार्मिक दृष्टि से बेहद खास माना जाता है. ब्रज क्षेत्र में शरद पूर्णिमा का संबंध भगवान श्रीकृष्ण की महारास लीला से भी जोड़ा जाता है. मान्यता (Sharad Purnima 2026) है कि इसी पूर्णिमा की रात श्रीकृष्ण ने गोपियों के साथ महारास रचाया था.


