संगरूर : पंजाब के संगरूर जिला स्थित शेरों गांव (सुनाम) में मुख्यमंत्री भगवंत मान की एक जनसभा के दौरान अप्रत्याशित घटनाक्रम सामने आने के बाद राज्य में बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता मोहनजीत सिंह ने कार्यक्रम स्थल के निकट एक मकान की छत पर (serious allegations against police) चढ़कर पंजाब सरकार की नीतियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और काले कपड़े लहराते हुए अपना विरोध दर्ज कराया। सुरक्षा व्यवस्था में तैनात पुलिसकर्मियों ने तत्काल एक्शन लेते हुए सुरक्षा कारणों का हवाला देकर मोहनजीत सिंह को एहतियातन हिरासत में ले लिया।
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हिरासत में पिटाई का आरोप: हिरासत से छूटने के पश्चात युवक ने आरोप लगाया कि पुलिस हिरासत के दौरान उसके साथ बर्बरतापूर्वक मारपीट की गई और शारीरिक प्रताड़ना दी गई।
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एसएसपी का आधिकारिक बयान: संगरूर की वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) नवजोत ग्रेवाल के अनुसार, युवक को सीएम की सुरक्षा को देखते हुए एहतियातन पकड़ा गया था। नियमानुसार उसका मेडिकल परीक्षण और डोप टेस्ट कराया गया, जिसकी रिपोर्ट में वह डोप पॉजिटिव पाया गया, जिसके बाद उसे छोड़ दिया गया।
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रिपोर्ट में हेरफेर का दावा: वहीं दूसरी ओर, पीड़ित युवक ने दावा किया कि डोप टेस्ट की रिपोर्ट पूरी तरह मनगढ़ंत है और पुलिस ने अपनी ज्यादतियों को छिपाने तथा उसे बदनाम करने के उद्देश्य से रिपोर्ट में हेरफेर किया है।
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सुखबीर सिंह बादल ने बताया ‘राष्ट्रीय शर्म’
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सच्चाई बोलने की सजा: शिरोमणि अकाली दल (SAD) के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने पूरे घटनाक्रम को ‘राष्ट्रीय शर्म’ करार दिया। उन्होंने कहा कि राज्य में नशे की गंभीर समस्या पर सच्चाई बयां करने वाले एक पंजाबी सिख युवक को आम आदमी पार्टी की सरकार द्वारा प्रताड़ित किया जा रहा है।
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पीआर इवेंट का आरोप: बादल ने तंज कसते हुए (serious allegations against police) कहा कि यह वही युवक है जिसने सुनाम के शेरों गांव में मुख्यमंत्री के एक कथित जनसंपर्क (PR) कार्यक्रम के दौरान सच सामने लाने की हिम्मत दिखाई थी।
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